उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन को 'यूपी बेरोजगार दिवस' के रूप में मनाकर राज्य में रोजगार की स्थिति पर फिर से चर्चा छेड़ दी गई है। बेरोजगार दिवस मनाने की अपील देशव्यापी आंदोलन 'युवा हल्ला बोल' की तरफ से की गई थी, आयोजकों का दावा है कि इसमें प्रदेश के लाखों युवाओं ने जमकर हिस्सा लिया।
'युवा हल्ला बोल' के संस्थापक और बेरोजगारी को राष्ट्रीय बहस बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले युवा नेता अनुपम ने चेताया कि रोजगार के नाम पर छलावे और सरकारी झूठ को युवा अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं करेगा। अनुपम ने कहा कि झूठे प्रचार की जगह सच्चे रोजगार पर सरकार काम करे, वरना बेरोजगार युवाओं का आक्रोश आगामी विधानसभा चुनाव में बहुत भारी पड़ेगा।
शनिवार को इस मुहिम का असर ऐसा हुआ कि देश ही नहीं, पूरी दुनिया में 'यूपी बेरोजगार दिवस' लाखों ट्वीट के साथ लगातार ट्रेंड करता रहा। अनेक लोगों ने उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी की हालत पर चर्चा की। मुख्यमंत्री योगी से लोगों ने सवाल कर उन्हें वादे याद कराए। 'युवा हल्ला बोल' के राष्ट्रीय समन्वयक गोविंद मिश्रा ने कहा कि एक बार फिर युवाओं ने आईटी सेल के प्रचार को पछाड़कर अपनी आवाज बुलंद कर दी है। 'यूपी बेरोजगार दिवस' पर हुए लाखों ट्वीट को गोविंद ने बेरोजगार युवाओं में व्याप्त आक्रोश का परिणाम बताया। यदि सरकार अब भी रोजगार के अवसरों और सरकारी भर्तियों पर ध्यान नहीं देती है तो युवाओं का यह असंतोष आंदोलन की शक्ल ले लेगा।
गोविंद ने याद दिलाया कि इन्हीं सवालों पर बीते 24 मार्च को इलाहाबाद में 'युवा हल्ला बोल' आयोजित हुआ था। अध्यक्ष अनुपम के नेतृत्व में 'युवा महापंचायत' आयोजित की गई। रोजगार के मुद्दे को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने के लिए युवा महापंचायतों का सिलसिला अब देश के कई शहरों तक पहुंचेगा। 'युवा हल्ला बोल' के उत्तर प्रदेश प्रभारी रजत यादव ने 'बेरोजगार दिवस' मुहिम में हिस्सा लेने वालों को बधाई दी।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि ऐसे ही युवा एकता आगे भी कायम रहेगी। रजत ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों समेत उन शिक्षकों का भी धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से सरकारों पर दबाव बन पा रहा है। ज्ञात हो कि रोजगार पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे दावों पर लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में अनुपम ने कई गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद से सरकार हरकत में तो आई, लेकिन भ्रामक दावे करने लगी।
अनुपम ने बताया कि सीएम आदित्यनाथ चार साल में चार लाख सरकारी नौकरी देने का प्रचार करते हैं। जब आरटीआई से इन नौकरियों का विभागवार ब्यौरा पूछा गया तो उन्हीं की सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। सवाल है कि जब सरकार खुद नहीं जानती कि चार लाख सरकारी नौकरी कहां दी गई हैं तो प्रचार में किस आधार पर ये दावा किया जा रहा है। अनुपम के अनुसार, सरकार अन्य अवसरों पर भी ऐसे दावे करती रही है जिनका वास्तविकता से लेना देना नहीं है। जैसे महराजगंज के दुर्गेश को लेखपाल की नौकरी देने का भ्रामक वीडियो जारी करवा दिया गया, जिसे बाद में डिलीट करना पड़ा।
गोविंद मिश्रा ने बताया कि यूपीएसएसएससी की कई भर्तियां वर्षों से पूरी नहीं हुई हैं। सवाल पूछने पर उचित जवाब नहीं दिया जाता। एक तरफ सरकार जवाबदेही से भागती है तो दूसरी तरफ बार बार गलत दावे किए जाते हैं। जनता के पैसे से ही जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। रोजगार के अभियान में लगातार मिल रही सफलता को देखकर अनुपम ने कहा है कि जिस तरह उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में रोजगार को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया, उसी तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी 'पढ़ाई कमाई दवाई' के नारे को बहस के केंद्र में लाया जाएगा।