कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को कहा कि उनके मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार या फेरबदल 13 या 14 जनवरी को होगा और शपथ-ग्रहण समारोह के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सात नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मंत्रिमंडल का विस्तार होगा या फेरबदल।
मंत्रिमंडल में फिलहाल 27 सदस्य हैं तथा सात रिक्त स्थान हैं। जब अब यह स्पष्ट हो गया है कि बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार/फेरबदल अंतत: इस सप्ताह होगा, ऐसे में मंत्री पद पद पाने के इच्छुक नेताओं ने सोमवार को प्रयास तेज कर दिए।
कुछ वर्तमान मंत्रियों को हटाए जाने की अटकलों से वे पसोपेश में हैं। येदियुरप्पा ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा और कर्नाटक प्रभारी (महासचिव अरुण सिंह) की सुविधा के अनुसार 13 या 14 जनवरी को शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि करीब सात सदस्यों को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। जब पूछा गया कि यह मंत्रिमंडल का विस्तार होगा या फेरबदल तो उन्होंने कहा कि देखते हैं।
आपको पता चल जाएगा। इससे पहले येदियुरप्पा ने रविवार को नई दिल्ली में कैबिनेट विस्तार की कवायद पर नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की थी। मुख्यमंत्री ने रविवार देर रात नई दिल्ली से लौटने के बाद कहा था कि सात सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा और वह सोमवार को विचार-विमर्श के बाद उनके नाम तय करेंगे।
लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की प्रतीक्षा
येदियुरप्पा लंबे समय से कैबिनेट का विस्तार करने की प्रतीक्षा कर रहे थे। भाजपा अध्यक्ष ने गत 18 नवंबर को नई दिल्ली में उनसे मुलाकात के दौरान इस कवायद के लिए केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी की प्रतीक्षा करने को कहा था।
मंत्रिमंडल से हटाए जाने की खबरों पर आबकारी मंत्री एच नागेश ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी कदम की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मैं ही हूं जिसने भाजपा सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया तथा मुख्यमंत्री एवं राज्य के लोग जानते हैं। ऐसी ही अटकलों के केंद्र में चल रहीं एक अन्य मंत्री शशिकला जोल्ले ने इस बारे में अनभिज्ञता प्रकट की, लेकिन कहा कि वह आलाकमान के फैसले का पालन करेंगी।
मंत्रिमंडल विस्तार/ फेरबदल एक मुश्किल भरी कवायद होने की संभावना है क्योंकि पार्टी के पुराने नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) से आए नेता मंत्रिपरिषद में जगह पाने की आस में हैं। इन दो विपक्षी दलों से बगावत कर आए नेताओं की वजह से ही भाजपा की सरकार बन पाई थी।