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सरकारी सेवाओं, सुविधाओं के लिए दर-दर नहीं भटकते राजस्थान के लोग

Wed, 21 Mar 2018 05:23 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
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दावा तो दावा होता है, कभी हकीकत से परे भी होता है, लेकिन राजस्थान सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने के अनुरूप उसका कार्यक्रम देश में सबसे अव्वल है। राज्य के प्रमुख सचिव आईटी अखिल अरोड़ा और उनके विभाग के सहयोगी मनु शुक्ला इसी का दावा करते हैं। अखिल अरोड़ा कहते हैं कि सरकार ने तकनीक का सहारा लिया, सूचना प्रौद्योगिकी को आधार बनाया और आज गांव से लेकर राजस्थान के शहर तक में लोगों को सरकारी सुविधाओं, सेवाओं के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता।

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का भी दावा है कि उनका राज्य सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश का लीडर है। राजस्थान ही वह राज्य भी है, जो सूचना प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है। राज्य सरकार ने अपने विकास कार्यों की एक झलक दिखाई है। इसके लिए जयपुर में 18-21 मार्च के लिए डिजिफेस्ट का आयोजन किया है। 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके हो रहे डिजिफेस्ट आयोजन में सरकार ने राज्य की जनता को तकनीक, तकनीक के प्रयोग, जन सुविधा तथा सुरक्षा सब कुछ आसानी से पा जाने की तकनीक को समझाने का प्रयास किया है। 

प्रमुख सचिव अखिल अरोरा कहते हैं कि हमने अपनी हर योजना में पहले गांव को देखा है। गांव से लेकर शहर तक परिवार की मुखिया के रूप में पहले महिला को देखा है, ताकि जो जरूरतमंद हैं उन्हें पहले सरकारी लाभ पाने की कतार से जोड़ सकें। वह कहते हैं कि हम कुछ ऐसा कर पाए तभी राजस्थान हैपिएस्ट इंडेक्स में सबसे अव्वल दर्ज है जबकि अन्य राज्य इसकी शुरुआत कर रहे हैं।
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डिजिटल इंडिया में सबसे आगे

digital india
अखिल अरोड़ा के सहयोगी मनु शुक्ला का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जयपुर तक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। 9,894 ग्राम पंचायतें हैं। सभी में राशन कार्ड, पहचान पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। ई-मित्र केंद्र के माध्यम से लोग उसे प्राप्त कर रहे हैं। अटल सेवा केंद्र के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग से लोग जुड़ रहे हैं। 13,900 करोड़ रुपये की सब्सिडी लोगों के खाते में सीधे तौर पर दी जा रही है।

वह इस पैसे का अपने जीवन स्तर को उठाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। 2020 तक 2.5 लाख ई-क्रांति सेंटर खोले जाने का काम चल रहा है। सभी ग्राम पंचायतों को इन सुविधाओं के साथ-साथ एटीएम आदि की भी सुविधा तेजी से दी जा रही है। राशन के लिए भी लोगों को भटकना नहीं पड़ता, बल्कि अब राजस्थान का कोई भी व्यक्ति किसी भी जिले से अपना बॉयोमेट्रिक और आधार नंबर देकर उसे सस्ते दर पर ले सकता है। 

इसी तरह से स्वास्थ्य समेत अन्य सेवाओं को भी तेजी से इससे जोड़ा जा रहा है। 1.9 करोड़ जनधन अकाउंट भी शुरू हो चुके हैं। इतना ही नहीं राजस्थान के लोगों की पहचान से जुड़े सभी दस्तावेजों को जहां सुरक्षित रखने का ध्यान दिया गया है, वहीं डिजिटल तकनीक का सहारा लेकर इन्हें इंटरकनेक्ट भी किया गया है। ताकि किसी की पहचान को लेकर कोई संकट न खड़ा होने पाए।

ढाई हजार को मिला ऑफर लेटर
राजस्थान के प्रमुख सचिव का कहना है कि राज्य सबसे बड़ा डिजिटल सेवा प्रदाता केंद्र बन चुका है। इससे राज्य सरकार को 340 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह भी हो रहा है और ई-मित्र समेत अन्य केंद्रों के माध्यम से लोगों को रोजगार मिल रहा है। खैर, राजस्थान चाहे जितना बड़ा दावा करे। एक हकीकत तो सामने है। राज्य के डिजिफेस्ट महोत्सव में रोजगार का पंजीकरण चल रहा है। 

तीन दिन में 23,500 बेरोजगार युवा जयपुर में डिजिफेस्ट में पंजीकृत हुए हैं। 131 कंपनियां 6.5 हजार रोजगार के अवसर लेकर आई हैं और 2.5 हजार 
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