अखिल अरोड़ा के सहयोगी मनु शुक्ला का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जयपुर तक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। 9,894 ग्राम पंचायतें हैं। सभी में राशन कार्ड, पहचान पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। ई-मित्र केंद्र के माध्यम से लोग उसे प्राप्त कर रहे हैं। अटल सेवा केंद्र के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग से लोग जुड़ रहे हैं। 13,900 करोड़ रुपये की सब्सिडी लोगों के खाते में सीधे तौर पर दी जा रही है।
वह इस पैसे का अपने जीवन स्तर को उठाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। 2020 तक 2.5 लाख ई-क्रांति सेंटर खोले जाने का काम चल रहा है। सभी ग्राम पंचायतों को इन सुविधाओं के साथ-साथ एटीएम आदि की भी सुविधा तेजी से दी जा रही है। राशन के लिए भी लोगों को भटकना नहीं पड़ता, बल्कि अब राजस्थान का कोई भी व्यक्ति किसी भी जिले से अपना बॉयोमेट्रिक और आधार नंबर देकर उसे सस्ते दर पर ले सकता है।
इसी तरह से स्वास्थ्य समेत अन्य सेवाओं को भी तेजी से इससे जोड़ा जा रहा है। 1.9 करोड़ जनधन अकाउंट भी शुरू हो चुके हैं। इतना ही नहीं राजस्थान के लोगों की पहचान से जुड़े सभी दस्तावेजों को जहां सुरक्षित रखने का ध्यान दिया गया है, वहीं डिजिटल तकनीक का सहारा लेकर इन्हें इंटरकनेक्ट भी किया गया है। ताकि किसी की पहचान को लेकर कोई संकट न खड़ा होने पाए।
ढाई हजार को मिला ऑफर लेटर
राजस्थान के प्रमुख सचिव का कहना है कि राज्य सबसे बड़ा डिजिटल सेवा प्रदाता केंद्र बन चुका है। इससे राज्य सरकार को 340 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह भी हो रहा है और ई-मित्र समेत अन्य केंद्रों के माध्यम से लोगों को रोजगार मिल रहा है। खैर, राजस्थान चाहे जितना बड़ा दावा करे। एक हकीकत तो सामने है। राज्य के डिजिफेस्ट महोत्सव में रोजगार का पंजीकरण चल रहा है।
तीन दिन में 23,500 बेरोजगार युवा जयपुर में डिजिफेस्ट में पंजीकृत हुए हैं। 131 कंपनियां 6.5 हजार रोजगार के अवसर लेकर आई हैं और 2.5 हजार