पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समुदाय को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान कुड़मी समुदाय के आंदोलन के समय दर्ज किए गए सभी मामले वापस लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी। इसके साथ ही कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में काम करने की बात भी कही गई है।
कुड़मी समुदाय के पुराने मामले वापस लेने का ऐलान क्यों हुआ?
- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान कुड़मी आंदोलन को लेकर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे।
- उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने कुड़मी समुदाय को एकजुट रखने के बजाय उसके भीतर विभाजन पैदा किया।
- सरकार ने इस साल समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आने वाले समय में इस राशि को और बढ़ाने की बात कही गई है।
- कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का वादा किया गया है। कुड़मी विकास बोर्ड को जल्द फिर से सक्रिय करने की बात भी कही।
कुड़मी आंदोलन के दौरान क्या हुआ था?
कुड़मी समुदाय ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कई आंदोलन किए थे। इन आंदोलनों में सड़क और रेल मार्गों को रोकने की घटनाएं भी शामिल थीं। समुदाय की प्रमुख मांगों में उसे अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देना और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना शामिल था। आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को लेकर अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें वापस लेने की घोषणा की है।
पुरुलिया में मुख्यमंत्री ने समुदाय को क्या भरोसा दिया?
पुरुलिया जिले में करम उत्सव के कार्यक्रम में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार इस साल के विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में कुड़मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने कुड़मी समुदाय के लिए ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे समुदाय एकजुट रह सके। अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार समुदाय से किए गए सभी वादों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने समुदाय के विकास के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये रखने की जानकारी भी दी।
कुड़माली और राजबंशी भाषा को लेकर क्या वादा किया गया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने को सुनिश्चित करेगी। कुड़माली भाषा मुख्य रूप से राज्य के पश्चिमी जिलों में रहने वाले कुड़मी समुदाय के लोग बोलते हैं। वहीं, राजबंशी भाषा उत्तर बंगाल में रहने वाले राजबंशी समुदाय से जुड़ी है। आठवीं अनुसूची में किसी भाषा को शामिल किए जाने का मतलब है कि उसे संविधान में मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची में जगह मिलती है। इसी मांग को लेकर कुड़मी समुदाय लंबे समय से अपनी आवाज उठाता रहा है।
कुड़मी विकास बोर्ड और 50 करोड़ रुपये का क्या मतलब है?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुड़मी विकास बोर्ड को जल्द फिर से चालू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल के बजट में समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और आने वाले दिनों में यह राशि बढ़ाई जाएगी। सरकार की ओर से यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब कुड़मी समुदाय अपनी सामाजिक और भाषाई मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन करता रहा है। पुराने मामलों को वापस लेने, विकास बोर्ड को फिर सक्रिय करने और भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का वादा समुदाय की प्रमुख मांगों से जुड़ा है।