तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। स्टालिन ने पत्र लिखकर मांग की है कि कावेरी डेल्टा में नीलामी के लिए प्रस्तावित तीन कोयला-लिग्नाइट खदानों को बाहर किया जाए। पत्र में स्टालिन ने लिखा कि नीलामी के बारे में तमिलनाडु सरकार से भी सलाह नहीं ली गई। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने एकतरफा कार्रवाई की है। उन्होंने पीएम से अनुरोध किया है कि भविष्य में ऐसे किसी फैसले से पहले सरकार से सलाह जरूर लिया जाए।
नीलामी की जानकारी सामने आते ही तमिलनाडु के किसान संघों ने कहा था कि अगर नीलामी हुई तो प्राकृतिक आपदा आ सकती है। नीलामी के विरोध में किसान संघों ने प्रदर्शन के लिए भी कहा था। किसान नेता पीआर पांडियन ने कहा कि अगर अनुमति दी जाती है, तो खनन परियोजना उपजाऊ भूमि को बंजर, भूजल की कमी कर देगी। इससे वहां रह रहे लोग भी जगह छोड़कर जा सकते हैं।
युवा कल्याण मंत्री ने दिया आश्वासन
सीपीआई (एम) और पीएमके सहित अन्य दलों ने तमिलनाडु में प्रस्तावित नीलामी का कड़ा विरोध किया है। मार्क्सवादी नेता टीएन विवासयगल संगम ने चेतावनी दी कि वह लगातार विरोध प्रदर्शन करेगें। कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम और युवा कल्याण मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि ऐसी खनन परियोजनाओं की अनुमति नहीं दी जाएगी। उधयनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन बुधवार को विधानसभा में इस संबंध में घोषणा करेंगे।
चावल का कटोरा है तीनों ब्लॉक
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश भर में नीलामी के लिए रखे गए 101 ब्लॉक में से 3 तमिलनाडु में हैं। पूर्वी सेठियाथोप, माइकलपट्टी और वडासेरी तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यह क्षेत्र काफी उपजाऊ है। जिसे राज्य का चावल का कटोरा माना जाता है। यह संरक्षित कृषि क्षेत्र है। स्टालिन ने कहा कि राज्य के 2020 अधिनियम की धारा 4 (1) के तहत कोई भी व्यक्ति संरक्षित कृषि क्षेत्र में कोल बेड मीथेन, शेल गैस, तेल और प्राकृतिक गैस की खोज या ड्रिलिंग आदि काम नहीं कर सकता। इसलिए, नीलामी प्रक्रिया बेकार की कवायद है।
स्टालिन ने कहा कि अगर केंद्र सूचना जारी करने से पहले राज्य सरकार से बात किया होता तो यह मुद्दे पहले ही स्पष्ट कर दिए गए होते। तीनों ब्लॉक कृषि भूमि में शामिल है और नीलामी से तमिलनाडु में खाद्य संकट आ सकता है।
प्रदर्शन से बच सकें
स्टालिन ने अनुरोध किया है कि भविष्य में इस तरह की सूचना जारी करने से पहले भारत सरकार के मंत्रालय राज्य सरकारों से परामर्श करें। उन्होंने पीएम से अनुरोध किया है कि मामले में नीलामी की सूचना वापस लिया जाए, जिससे प्रदर्शन और लोगों के आक्रोश से बचा जा सके।