कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद पर बयान देते हुए साफ कहा कि बेलगावी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। शनिवार (01 नवंबर) को मैसूर बैंक सर्कल स्थित नृपतुंगा मंडप में आयोजित देवी भुवनेश्वरी और अन्नमा देवी की भव्य शोभायात्रा को सीएम सिद्धारमैया ने हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने कि बेलगावी कर्नाटक का अभिन्न अंग है और इसे महाराष्ट्र में कभी विलय नहीं करने दिया जाएगा।
बेलगावी का महाराष्ट्र में कभी विलय नहीं होगा-सिद्धारमैया
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद पर महाजन समिति की रिपोर्ट अंतिम है। सिद्धारमैया ने कहा, "बेलगावी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। महाराष्ट्र सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन महाजन रिपोर्ट अंतिम है। हम बेलगावी को नहीं जाने देंगे, क्योंकि यह कन्नड़ भूमि है और कर्नाटक का हिस्सा है। कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता।"
दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद
दरअसल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद दशकों से चला आ रहा है, पड़ोसी राज्य बेलगावी और उसके आसपास के इलाकों पर मराठी भाषी आबादी का हवाला देते हुए दावा करता है। वहीं कर्नाटक ने महाजन समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के दावे को खारिज किया है।
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राज्य में एक विधानसभा सत्र बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौध में आयोजित होता है, जो बंगलूरू स्थित विधान सौध की प्रतिकृति है। सीएम सिद्धारमैया ने बताया कि राज्य में पहले महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के पांच विधायक चुने जाते थे, लेकिन अब उनकी संख्या शून्य हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "एमईएस के लोग भी कन्नड़ हैं। अगर उनमें से कोई भी उपद्रव में लिप्त पाया जाता है, तो हम उससे सख्ती से निपटेंगे।"
उन्होंने कन्नड़ कार्यकर्ताओं से कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में कन्नड़ स्कूलों के विकास के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है। राज्य के हितों की रक्षा के लिए कन्नड़ कार्यकर्ताओं के संघर्ष की सराहना करते हुए सिद्धारमैया ने उन्हें आश्वासन दिया कि कन्नड़ समर्थक आंदोलनों के लिए उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से कन्नड़ भूमि, भाषा और संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान किया। सिद्धारमैया ने कहा कि जिन लोगों ने कन्नड़ की धरती पर अपना जीवन बसाया है, उन्हें कन्नड़ के माहौल का सम्मान करना चाहिए।
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भाषाई आधार पर महाराष्ट्र चाहता है राज्य में शामिल करना
बता दें कि बेलगावी शहर और आसपास के क्षेत्रों में दोनों राज्यों के लोग रहते हैं। महाराष्ट्र भाषाई आधार पर बेलगावी, बीदर, कलबुर्गी, विजयपुरा और कारवार के 865 गांवों को अपने राज्य में शामिल करना चाहता है। जबकि यहां कुछ कन्नड़ भाषी गांवों भी हैं। ये विवाद 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद से ही शुरू हुआ है।