तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी
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तेलंगाना सरकार स्थानीय निकायों में कुल 69 प्रतिशत आरक्षण लागू करने जा रही है। खुद सीएम रेवंत रेड्डी ने इस बात का एलान किया है। उन्होंने अपने तमिलनाडु के अपने समकक्ष एमके स्टालिन की तारीफ करते हुए कहा कि यह पहल तमिलनाडु की नीतियों से प्रेरित है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि इस आरक्षण में से 42 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी के लिए और 27 प्रतिशत एससी और एसटी के लिए रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल तमिलनाडु की नीतियों से प्रेरित है।
वे चेन्नई में तमिलनाडु सरकार के शिक्षा सुधार कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि तेलंगाना भी शिक्षा क्षेत्र में नए सुधार लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एससीटी और अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा के लिए राज्य में सभी विधानसभा क्षेत्रों में आवश्यक अवसंरचना स्थापित की जाएगी।
आगे बोलते हुए अपने संबोधन में रेवंत ने कहा कि उनके प्रशासन ने आईटीआई को आधुनिक तकनीकी केंद्रों में बदलने के लिए टाटा कंपनी के साथ समझौता किया गया है, जहां छात्रों को एआई और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा अगले शैक्षणिक वर्ष से छात्रों को मासिक 2,000 रुपये की छात्रवृत्ति और बीएफसी जैसे कार्यक्रम की तरह एक ब्रेकफास्ट की योजना भी शुरू की जाएगी।
तमिलनाडु सरकार की सराहना की
आगे अपने संबोधन में मुख्यमंत्री रेड्डी ने तमिलनाडु सरकार की विभिन्न योजनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा में निवेश किसी दान या परोपकार का विषय नहीं, बल्कि न्याय और मूलभूत अधिकार है। उन्होंने दोनों दक्षिणी राज्यों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी याद किया और कहा कि तेलंगाना और तमिलनाडु की साझा नीतियां सामाजिक न्याय और रोजगार में उदाहरण स्थापित करती हैं।
इस दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा कि यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी के माध्यम से 100 प्रतिशत छात्रों को रोजगार सुनिश्चित किया गया है। साथ ही भविष्य में खेल विश्वविद्यालय और अकादमी शुरू की जाएगी। उन्होंने तमिल छात्रों को भी इसमें शामिल करने की संभावना जताई।