तमिलनाडु की सियासत, जिसका हमेशा से सिनेमा के साथ करीबी रिश्ता रहा है और एक बार फिर सिनेमाई पर्दे की तरह AIADMK के दो गुटों का विलय भी हो गया। पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम गुट अब एक हो गए। यानि जयललिता जहां से पार्टी को छोड़कर गईं वहीं से अब दोनों गुटों के मिलने के बाद तमिलनाडु की राजनीति आगे बढ़ेगी। और इन सबके बीच एक किरदार ऐसा भी है जिसका सिनेमाई पर्दे की तरह राज्य की राजनीति से संभवत: विदाई भी कर दी गई... वो किरदार हैं शशिकला।
14 फरवरी 2017 शशिकाल की जिंदगी का सबसे बुरा दिन साबित हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला को चाल साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही तमिलनाडु में 'अम्मा' के नाम से मशहूर जयललिता के बाद उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में मुख्यमंत्री बनने का उनका ख्वाब 10 साल के लंबे समय के लिए धूमिल हो गया।
चेन्नई से 330 किलोमीटर दूर थिरुथुरईपूंडी में 1957 में जन्मी शशिकला की शादी तमिलनाडु सरकार में जनसंपर्क अधिकारी रहे एम.नटराजन से हुई थी। 1980 के दशक में ही नटराजन ने दक्षिण अरकट जिले की कलेक्टर वीएस चंद्रलेखा से शशिकला की जयललिता से मुलाकात कराने की अपील की थी। तत्कालीन अन्नाद्रमुक प्रचार सचिव नटराजन ने तब यह प्रस्ताव रखा कि शशिकला ही जयललिता के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी करेंगी। जयललिता भी शशिकला के काम से संतुष्ट थीं। इसके बाद दोनों की दोस्ती पक्की हो गईं।
80 के दशक में शशिकला पार्टी की प्रचार सचिव हुआ करती थीं। दोनों की दोस्ती बेहद गहरी थी। लोग तो उन्हें जयललिता की परछाई तक कहा करते थे। लेकिन साल 2011 में दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। इसके बाद जयललिता ने शशिकला को अपनी पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने शशिकला से पूरी तरह दूरी बना ली थी।
हालांकि बाद में दोनों के रिश्ते तब सामान्य हो गए, जब शशिकला ने उनसे माफी मांग ली। माफी मांगने पर जयललिता ने शशिकला को माफ कर दिया। पांच दिसंबर 2016 को बीमारी के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का निधन हो गया। जयललिता के निधन के बाद शशिकला ने तेजी से राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में किया, सबसे पहले उन्होंने उस व्यक्ति से इस्तीफा लिया, जिसे जयललिता ने जीते जी अपनी जगह बिठाया था।
शशिकला
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कार्यवाहक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी पन्नीरसेलवम ने कई बार निभाई। पर जयललिता के देहांत के फौरन बाद उनकी सहेली यानी शशिकला का असली रूप दिखने लग गया। सुप्रीम कोर्ट ने ऐन वक्त पर हस्तक्षेप न किया होता, तो कौन कह सकता है कि तमिलनाडु को कैसे दौर से गुजरना पड़ता।
वंशवाद को आगे बढ़ाने वाले राजनेताओं को भी यह देखकर अजीब लगा होगा कि एक दिवंगत मुख्यमंत्री की वारिस उनकी सहेली बन गईं। वह भी ऐसी सहेली, जिसने कभी चुनाव नहीं लड़ा और प्रशासन चलाने का जिसे बिल्कुल भी अनुभव नहीं है। हालांकि जयललिता के समय प्रशासन से जुड़े फैसले वह लेती थीं। लेकिन पर्दे के पीछे से फैसले करना अलग बात है और कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा ठोकना बिल्कुल अलग बात।
शशिकला समर्थक तर्क दे रहे थे कि ‘चिनम्मा’ (छोटी अम्मा) का वारिस बनना इसलिए सही है कि अम्मा के साथ जितना समय उन्होंने बिताया, उतना किसी और ने नहीं बिताया। पन्नीरसेलवम ने इस पर बहुत सटीक जवाब दिया कि अम्मा’ के घर में और भी कई लोग काम करते थे, क्या उन सबको मुख्यमंत्री बनने का अधिकार होना चाहिए?
शशिकला तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री की रिश्तेदार नहीं, सिर्फ दोस्त थीं। वह भी ऐसी दोस्त, जिसके भ्रष्ट रिश्तेदारों को जयललिता ने कुछ साल पहले घर से निकाल दिया था। जयललिता के घर में शशिकला की वापसी तब हुई, जब उसने अपने परिवार से दूर रहने का वायदा किया। पर अब उसके सारे परिजन वापस आ गए हैं। सर्वोच न्यायालय के हस्तक्षेप से फिलहाल इस परिवार की ‘सेवा’ पर रोक लग गई है, लेकिन कब तक?
पिछले 11 महीनों से नाटकीय घटनाओं की गवाह रही है। खासकर पिछले सितंबर से, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता अस्पताल में भर्ती हुई थीं। लेकिन अब वहां की राजनीति चरमोत्कर्ष की तरफ बढ़ रही है। और अब अन्नाद्रमुक के दोनों गुट आपसी झगड़े सुलझा कर एक हो गए।