त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को नए मंत्रियों को विभाग बांट दिए। वहीं सबसे महत्वपूर्ण गृह विभाग अपने पास ही रखा। मुख्य सचिव जे के सिन्हा द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, माणिक साहा ने गृह, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और पीडब्ल्यूडी विभाग अपने पास रखा है, जबकि रतन लाल नाथ को बिजली, कृषि और किसान कल्याण का प्रभार दिया गया है।
प्रणजीत सिंघा रॉय को योजना और समन्वय और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ वित्त विभाग मिला है। सुशांत चौधरी खाद्य और नागरिक आपूर्ति, परिवहन और पर्यटन के नए प्रभारी मंत्री हैं जबकि सनातन चकमा को उद्योग और वाणिज्य का प्रभार दिया गया है। वहीं टिंकू रॉय खेल विभाग देखेंगे।
साथ ही बिकाश देबबर्मा को आदिवासी कल्याण, हथकरघा, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादन और सांख्यिकी मिला है जबकि सुधांशु दास अनुसूचित जाति कल्याण, पशु संसाधन और मत्स्य पालन के मंत्री हैं। आईपीएफटी के एकमात्र विधायक सुक्ला चरण नोतिया को सहकारिता, आदिम जाति कल्याण (टीआरपी एंड पीटीजी) और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग दिया गया है।
अधिसूचना में कहा गया है कि अन्य सभी विभाग जो किसी भी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा देखा जाएगा। साहा और उनके मंत्रियों को आठ मार्च को शपथ दिलाई गई थी। मुख्यमंत्री शिक्षा, सूचना और सांस्कृतिक मामले, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कानून और संसदीय मामलों जैसे विभाग भी देखेंगे क्योंकि ये किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।
हिंसा की जांच करने माकपा, भाकपा, कांग्रेस की टीम त्रिपुरा पहुंची
माकपा, भाकपा और कांग्रेस के नेताओं वाला आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल त्रिपुरा में चुनाव बाद हुई हिंसा का जायजा लेने के लिए तथ्यान्वेषी मिशन पर शुक्रवार को यहां पहुंचा। टीम के 12 मार्च तक राज्य में रहने की उम्मीद है, जिसके बाद वह एक रिपोर्ट सौंपेगी और इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा, जो 13 मार्च से बुलाई जाएगी। इसको लेकर सीपीआई सांसद बिनॉय विस्वाम ने गुरुवार को ट्वीट भी किया था।
राज्य के वरिष्ठ माकपा नेता, पबित्रा कर ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल को तीन टीमों में विभाजित किया जाएगा, जो पश्चिमी त्रिपुरा, सिपाहीजाला और खोवाई के प्रभावित जिलों का दौरा करेगा। पबित्रा कार ने दावा किया कि दो मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से राज्य में हिंसा के बाद की करीब 1,200 घटनाएं हुई हैं।
साथ ही कहा कि घायलों की सही संख्या के साथ-साथ क्षति की सीमा का पता नहीं लगाया जा सका क्योंकि चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद से अनगिनत घटनाएं हुई हैं। चुनाव के बाद की हिंसा पर एक प्रामाणिक रिपोर्ट संकलित करने के लिए एक प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। वहीं जीबीपी अस्पताल में शुक्रवार को घायलों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने पुलिस से अमन-चैन बनाए रखने के लिए उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा।