फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भवानीपुर चुनाव पर ममता की याचिका: जज बोले- भाई BJP प्रवक्ता, फिर भी सुनवाई करेंगे; EVM पर दिया बड़ा आदेश

Tue, 23 Jun 2026 06:44 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

Mamata Banerjee Petition: भवानीपुर विधानसभा चुनाव में हार के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने बताया कि उनके बड़े भाई भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ मामले की सुनवाई करेंगे। अदालत ने मतगणना केंद्र के सीसीटीवी फुटेज, ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। आइए, विस्तार से मामले को समझते हैं...
विज्ञापन
ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर सुनवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा भवानीपुर विधानसभा चुनाव मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से अपनी हार को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया, जब न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने खुद बताया कि उनके बड़े भाई भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ मामले की सुनवाई करेंगे ताकि बाद में किसी पक्ष को कोई आपत्ति न रहे। अदालत ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ईवीएम और वीवीपैट को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है।

विज्ञापन


मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने ममता बनर्जी के वकील और तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी से कहा कि वह एक महत्वपूर्ण तथ्य सार्वजनिक करना चाहते हैं। जज ने कहा कि उनके बड़े भाई भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, इसलिए वह पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के बाद ही मामले की सुनवाई करेंगे। इस पर कल्याण बनर्जी ने अदालत से कहा कि उन्हें न्यायपालिका और न्यायमूर्ति गौरांग कांत की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश के प्रति उनका सम्मान किसी अन्य कारक पर निर्भर नहीं करता।

ये भी पढ़ें- MEA: '10 भारतीय जहाज अब भी फारस की खाड़ी में', विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को भी लताड़ा

क्या सुरक्षित रखने का आदेश दिया हाईकोर्ट ने?

सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और मतगणना केंद्र के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित मतगणना केंद्र के चार मई के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मतगणना हॉल के अंदर और बाहर की सभी रिकॉर्डिंग को न तो मिटाया जाएगा और न ही उसके साथ कोई छेड़छाड़ की जाएगी।

विज्ञापन


इसके अलावा अदालत ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों में इस्तेमाल की गई ईवीएम, कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट मशीनों को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन मशीनों को बिना अदालत की अनुमति के न खोला जाएगा, न स्थानांतरित किया जाएगा और न ही किसी अन्य चुनाव में इस्तेमाल किया जाएगा। मामले के अंतिम निपटारे तक ईवीएम जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में रहेंगी।

ममता बनर्जी ने याचिका में क्या आरोप लगाए?

ममता बनर्जी ने अपनी चुनाव याचिका में मतदाता सूची से अवैध रूप से नाम हटाने, मतगणना में गड़बड़ी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। याचिका में दावा किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाए गए। साथ ही निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति में हितों के टकराव का भी आरोप लगाया गया है।

कल्याण बनर्जी ने अदालत में दावा किया कि मतगणना के 12वें राउंड तक ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन इसके बाद अचानक स्थिति बदल गई। उन्होंने कहा कि 12वें राउंड तक ममता 7,184 वोटों से आगे थीं, लेकिन बाद में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को बढ़त मिल गई। तृणमूल की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि मतगणना एजेंटों को मतगणना हॉल से बाहर रखा गया, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।

क्या रिटर्निंग अधिकारी पर भी सवाल उठाए गए?

तृणमूल कांग्रेस ने अदालत में रिटर्निंग अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी का आरोप है कि भवानीपुर चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी ने 2021 के नंदीग्राम चुनाव में भी यही जिम्मेदारी निभाई थी, जहां ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया कि चुनाव के बाद कुछ अधिकारियों को राज्य सरकार में महत्वपूर्ण पद दिए गए, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को भी चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद की जाएगी। गौरतलब है कि भवानीपुर सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें