महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को भाषणों में हास्य के घटते स्तर पर अफसोस व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे भाषणों का आनंद फीका पड़ रहा है, क्योंकि लोग अब गलत व्याख्या से बचने के लिए सावधानी बरत रहे हैं। फडणवीस विधान भवन में मराठी भाषा गौरव दिवस समारोह में बोल रहे थे। राज्य सरकार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि वी.वी. शिरवाडकर की जयंती के उपलक्ष्य में मराठी भाषा गौरव दिवस मनाती है, जो कुसुमाग्रज उपनाम से लिखते थे।
मराठी भाषा पर की बात
केंद्र सरकार की ओर से मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने इस मान्यता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। फडणवीस ने भाषा की विविधता पर जोर देते हुए कहा कि हमारी भाषा समृद्ध है। इसके साथ ही इसमें विविधताएं भी हैं। चूंकि मैं विदर्भ क्षेत्र से आता हूं, इसलिए मेरी उच्चारण शैली यहां स्वीकार्य नहीं थी। मैंने बाद में इसे बदल दिया।" उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने दुनिया पर राज किया। इसलिए, अंग्रेजी भाषा वैश्विक हो गई। लोगों ने इसे सीखा, कुछ ने इसलिए क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था।
उन्होंने कहा कि एक बार जब हम लोगों में यह भावना पैदा कर देंगे कि मराठी सीखने से लोग प्रगति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं, तो भाषा का भविष्य बेहतर होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषा से जुड़े अवसर पैदा करने से इसकी निरंतर प्रासंगिकता और विकास सुनिश्चित होगा।