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बाल ठाकरे जयंती: उद्धव ठाकरे से मिले फडणवीस, 100 करोड़ के स्मारक के लिए सौंपे दस्तावेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 23 Jan 2019 01:19 PM IST
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ट्रस्ट को दस्तावेज सौंपते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस - फोटो : ANI

भाजपा नीत महाराष्ट्र सरकार ने शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बाल ठाकरे के स्मारक के निर्माण के लिए बुधवार को महानगर के नगर निकाय ने भूमि का कब्जा ट्रस्ट को सौंपा है। स्मारक के लिए 100 करोड़ रुपये के बजट को मंगलवार को मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इससे संबंधित कागज ट्रस्ट को सौंपे हैं। बाल ठाकरे मेमोरियल ट्रस्ट को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ही संभालते हैं।


इसे आम चुनाव से पहले सहयोगी शिवसेना के साथ संबंधों में सुधार के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा था कि भाजपा और उसके सहयोगी दल शिवसेना के बीच "मधुर संबंध है और रहेगा।" उन्होंने था कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच समझौता होने की "काफी संभावना" है क्योंकि भाजपा गठबंधन के पक्ष में है। केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना दोनों सरकारों की अक्सर आलोचना करती रही हैं। पिछले साल, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आगामी चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा की थी। 


शिवसेना बाल ठाकरे की जयंती के मौके पर शहर के मेयर के बंगले में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मेयर के बंगले को स्मारक के हिस्से के तौर पर संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा। 


भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा था, "दिवंगत बाला साहेब ठाकरे केवल शिवसेना के नहीं बल्कि इस गठबंधन के नेता थे। बालासाहेब सभी राजनीति दलों के लिए महत्वपूर्ण व्यक्ति रहेंगे। इसलिए आज मंत्रिमंडल ने उनके स्मारक के लिए 100 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिससे युवकों को प्रेरणा मिलेगी।" 


उन्होंने बताया था कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) धन प्रदान करेगा और भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पार्टियां चुनाव से पहले गठबंधन करने में सक्षम होंगी। मंत्रिमडल के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना विधायक अनिल परब ने कहा कि सरकार को इसके लिये बधाई दी जानी चाहिये। हालांकि, इसका गठबंधन की संभावना पर असर नहीं होगा क्योंकि स्मारक के निर्माण का फैसला सरकार ने पांच साल पहले किया था।

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