महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य सरकार के सूचना और प्रचार निदेशालय के तहत स्थापित किए जाने वाले मीडिया निगरानी केंद्र को लेकर उठे सवालों को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि निगरानी केंद्र के जरिए मीडिया को नियंत्रित करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण के उद्देश्य से छपने या प्रसारित होने वाली खबरों पर ध्यान देने के लिए इस तंत्र को बनाया जा रहा है।
राज्य सरकार के सूचना और प्रचार निदेशालय के तहत स्थापित किए जाने वाले मीडिया निगरानी केंद्र (एमएमसी) को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। एक प्रस्ताव में कहा गया था कि प्रकाशनों, चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की संख्या बढ़ने के कारण इस तरह का केंद्र बनाने की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि सरकारी योजनाओं और नीतियों से संबंधित समाचार कैसे दिए जाते हैं, इसकी निगरानी की आवश्यकता थी।
सरकार से संबंधित खबरों को पीडीएफ के रूप में एकत्र करने के लिए एक पेशेवर सलाहकार को काम पर रखा जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न मुद्दों, व्यक्तियों, विभागों, सकारात्मक और नकारात्मक जैसी श्रेणियों को भी विभाजित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमारा मीडिया को नियंत्रित करने का कोई इरादा नहीं है लेकिन हम छपी और प्रसारित की गई खबरों पर ध्यान देना चाहते हैं। अगर कोई भ्रामक या नकारात्मक खबर हो तो हम उसका तुरंत जवाब दे सकें या स्पष्टीकरण दे सकें।
लव जिहाद को रोकने के लिए प्रस्तावित कानून के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा कि अतंरधार्मिक विवाह बुरे नहीं हैं। लेकिन कई मामलों में फर्जीवाड़ा करके या पहचान छिपाकर अंतरधार्मिक शादियां की जाती हैं जिनमें जबरन धर्म परिवर्तन और बच्चे के जन्म के बाद पत्नी को छोड़ना शामिल है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। ऐसी शादियों में धोखा खाने के बाद महिलाएं अक्सर खुद को सड़कों पर पाती हैं। लव जिहाद के मुद्दे को लेकर सरकार और पुलिस के अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है जो इस तरह के मामलों से निपटने और कानून का मसौदा तैयार करने के तरीके पर काम करेगी।
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