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CSIR: डॉ. शेखर मांडे बोले- TB के नए BCG टीके का जल्द शुरू होगा क्लीनिकल ट्रायल, तकनीक कर रही डॉक्टरों को मदद

Fri, 06 Jan 2023 06:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

डॉ. शेखर मांडे ने कहा कि सीएसआईआर 2025 तक भारत से बैक्टीरिया की बीमारी को खत्म करने केलिए तेजी से निदान, टीकाकरण और उपचार की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, हम मुख्य रूप से टीबी के लिए नई दवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 
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Tuberculosis Vaccine - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुंसधान परिषद (सीएसआईआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे ने शुक्रवार को कहा कि तपेदिक या टीबी के लिए एक नए बीसीजी टीके का नैदानिक परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) जल्द ही भारत में शुरू होगा। मांडे यहां नागपुर में भारतीय विज्ञान कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे। 

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तकनीक ने की डॉक्टरों को टीबी को समझने में मदद
इससे पहले दिन में डॉ. मांडे ने ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) रिसर्च में बायोफिजिकल मेथड्स पर एक प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि किस तरह की तकनीक ने डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को टीबी को बेहतर ढंग से समझने में मदद की है और संक्रामक बीमारी से निपटने के तरीके तैयार किए हैं। 
 

टीबी को देश से खत्म करने की दिशा में चल रहा काम
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सीएसआईआर 2025 तक भारत से बैक्टीरिया की बीमारी को खत्म करने केलिए तेजी से निदान, टीकाकरण और उपचार की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, हम मुख्य रूप से टीबी के लिए नई दवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम टीबी की  रोकथाम के लिए अनुसंधान पर लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं। 
 

बीसीजी टीके के क्लीनिकल ट्रायल शुरु होगा
डॉ. मांडे ने कहा कि राष्ट्रीय क्षय रोग अनुसंधान संस्थान, चेन्नई टीबी के लिए नए बीसीजी टीके का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगा। बैसिल कैल्मेट गुएरिन (बीसीजी) टीका मुख्य रूप से तपेदिक के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। इंडिया टीबी रिपोर्ट 2022 के मुताबिक, 2021 के दौरान टीबी रोगियों (नए और पुराने मामले) की संख्या 19.3 लाख थी। 

 

2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाना सरकार का लक्ष्य
2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के सरकार के लक्ष्य पर उन्होंने कहा, देश के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर समेत विभिन्न एजेंसियों में बहुत गंभीर प्रयास चल रहे हैं और टीबी मुक्त 2025 की दिशा में काम कर रहे हैं। 
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टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना चुनौती क्यों?
उन्होंने कहा, यह लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकी भारत में टीबी रोगियों की संख्या बहुत ज्यादा है। डॉ. मांडे ने कहा, अनुमान है कि करीब तीस फीसदी आबादी पहले माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (जीवाणु जो टीबी का कारण बनता है) से संक्रमित है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि उस तीस फीसदी में करीब नब्बे फीसदी अपने जीवनकाल में कभी भी टीबी को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन तीस फीसदी में से केवल दस फीसदी को कभी न कभी टीबी होगा। 
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