विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के मद्देनजर बच्चों की वैक्सीन को पूरी दुनिया के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी डेल्टा वैरिएंट को बच्चों के लिए खतरनाक बताते हुए उनके टीकाकरण के लिए जल्द से जल्द व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। भारत इस दिशा में कई कदम आगे बढ़ चुका है। उम्मीद की जा रही है कि जुलाई के मध्य तक बच्चों की वैक्सीन विकसित होकर उनके लगाने का शेड्यूल जारी किया जा सकता है। एम्स पटना और दिल्ली में क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुके हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश में जिस तरीके से बच्चों की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुए हैं, उससे अनुमान यही है कि जुलाई के मध्य तक बच्चों के टीके बनने शुरू हो जाएंगे और उनका शेड्यूल भी तय हो जाएगा। हालांकि क्लीनिकल ट्रायल के बाद वैक्सीनेशन डेवलपमेंट को लेकर जो प्रक्रिया होती है उसमें एक तय वक्त लगता है। बच्चों के लिए बन रही वैक्सीन पर नजर रखने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य कहते हैं कि जिस तेजी से टीका बनाने की दिशा में काम हो रहा है उससे अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में बच्चों को इसकी डोज़ लगनी शुरू हो जाएगी।
तीन चरण में हो रहे हैं बच्चों के क्लीनिकल ट्रायल
बच्चों के लिए टीकों के डेवलपमेंट की प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है। क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े एम्स दिल्ली और एम्स पटना के चिकित्सकों के मुताबिक पहले चरण में 12 से 18 साल के बच्चों का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जा चुका है। दूसरे चरण में 6 से 12 साल फिर तीसरे चरण में 2 से 6 साल के बच्चों पर ये ट्रायल किए जाएंगे। पहले चरण की प्रगति को देखकर आगे की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी हैं।
देश में टीकाकरण के अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि अभी भी गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीका लगाया ही जा रहा है। खासकर स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीके की डोज देने के बाद बच्चों में कोई असर नहीं दिखा है। हालांकि यह टीका पूर्णतया बड़ों के लिए है लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत कुछ इस टीकाकरण की व्यवस्था से भी क्लीनिकल ट्रायल में राह आसान हो जाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस साल के अंत तक 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका लगना है। इसी दौरान बच्चों के लिए तैयार किए गए टीके को भी लगाना शुरू कर दिया जाएगा। इससे लगता है कि दो साल से अधिक उम्र के सभी बच्चे वयस्क और बुजुर्ग भी शामिल हैं, उन सभी को टीका लगाने की योजना जल्दी ही और रफ्तार पकड़ लेगी।