नेचर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि तापमान में वृद्धि, वर्षा में परिवर्तन, लगातार होने वाली चरम घटनाएं और समुद्र के स्तर में वृद्धि जैसे बदलाव सीधे विश्व धरोहर स्थलों की विशेषताओं तथा उनके सार्वभौमिक महत्व को खतरे में डाल सकते हैं।
दुनिया भर में धरोहर स्थल जलवायु परिवर्तन से अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 20 स्थल हैं, जिनमें तस्मानिया में पोर्ट आर्थर ऐतिहासिक स्थल जैसे स्थलों से लेकर काकाडू राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत स्थल तक शामिल हैं। एक शोध में कहा गया है कि इस क्षेत्र के लिए बड़े खतरों में से एक जंगल की आग है जिसे रोकने के बारे में बहुत सारे बड़े-बड़े काम किए जा रहे हैं, लेकिन ये पर्याप्त संसाधनों पर निर्भर करते हैं।
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नेचर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि तापमान में वृद्धि, वर्षा में परिवर्तन, लगातार होने वाली चरम घटनाएं और समुद्र के स्तर में वृद्धि जैसे बदलाव सीधे विश्व धरोहर स्थलों की विशेषताओं तथा उनके सार्वभौमिक महत्व को खतरे में डाल सकते हैं। विश्व धरोहर स्थलों पर खतरों की समीक्षा में, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) वर्ल्ड हेरिटेज आउटलुक ने पहचान की है। आईयूसीएन के अनुसार 2017 के बाद से दुनिया भर में ज्यादातर प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों में सुधार की तुलना में गिरावट आई है।
मौसमी घटनाओं के प्रभाव में लगातार हो रही वृद्धि
विश्व धरोहर स्थलों में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं के आकार और गंभीरता में वृद्धि हुई है और कई बड़े हिस्सों में वृद्धि जारी रहने का अनुमान है। इससे इनके आवरण को भारी नुकसान हो रहा है। उदाहरण के लिए, गर्मी और नमी के कारण खराब होना, तूफान से पानी का प्रवेश और तूफानी हवा से नुकसान पहुंचना शामिल है।
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तीन तरह के उपाय के जरिये कर सकते हैं संरक्षण
शोधकर्ताओं के अनुसार जलवायु परिवर्तन विश्व धरोहर स्थलों की उन विशेषताओं को बदल रहा है जिनके कारण उन्हें विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है। इनके संरक्षण के लिए एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाना है जो जलवायु परिवर्तन के माध्यम से विश्व विरासत का प्रबंधन करने के तरीके में कई अलग-अलग हितधारकों की इच्छाओं और महत्व पर विचार करता है। दूसरा तरीका, हमें इस बारे में अधिक सोचने की जरूरत है कि पारिस्थितिकी तंत्र, परिदृश्य, प्राकृतिक चीजें, ऐतिहासिक बुनियादी ढांचे और स्वदेशी कला जैसे सांस्कृतिक मूल्य कैसे जुड़े हुए हैं।