जर्मनी के पोड्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि जलवायु प्रभावों वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2049 तक सालाना 38,000 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण अगले 25 वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को करीब 19 फीसदी आय का नुकसान होने की उम्मीद है। बुधवार को प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह जानकारी दी गई है।
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यह अध्ययन जर्मनी के पोड्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के वैज्ञानिकों ने किया है। अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु प्रभावों वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2049 तक सालाना 38 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।
नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक लियोनी वेन्ज ने कहा, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन से अगले 25 वर्षों के भीतर दुनिया भर के लगभग सभी देशों में बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होगा। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी जैसे उच्च विकसित देश भी शामिल हैं।
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एक अन्य शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि इससे दक्षिण एशिया और अफ्रीका बुरी तरह प्रभावित होंगे। शोधकर्ताओं ने पिछले चालीस साल के दौरान दुनियाभर के 1600 से ज्यादा क्षेत्रों के मौसम और आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आय में कमी 11 फीसदी से 29 फीसदी के बीच हो सकती है, जो विभिन्न जलवायु परिदृश्य में अनिश्चितताओं और आंकड़ों पर निर्भर करती है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि नुकसान का अनुमान बड़े पैमाने पर है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए करीब छह गुना अधिक खर्च होगा, जो औसत तापमान वृद्धि को केवल दो डिग्री सेल्सियस नीचे रखने के लिए पर्याप्त होगा।