पृथ्वी के तापमान में बढ़ोतरी के कारण बीजों के अंकुरण और पौधों की वृद्धि के समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बदलाव पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। होल्डन फॉरेस्ट्स एंड गार्डन्स, नॉर्थवेस्टर्न और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि तापमान में बढ़ोतरी के कारण बीजों के अंकुरण के समय में बदलाव आ रहा है, जिससे वनस्पति समुदायों की संरचना प्रभावित हो रही है।
एक नजर अध्ययन पर
यह अध्ययन ‘इकोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार अंकुरण का समय केवल एक प्रजाति ही नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को प्रभावित करता है। बीज के अंकुरण का समय यह निर्धारित करता है कि वह सूरज की रोशनी, जल और पोषक तत्वों के लिए कितनी बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
कुछ पौधे बढ़ते तापमान के अनुरूप जल्दी अनुकूलित हो जाते हैं और मौसम से पहले ही अंकुरित हो जाते हैं, जबकि कुछ प्रजातियां अपने सामान्य चक्र का पालन करती हैं। इससे शुरुआती अंकुरित पौधों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है और वे अन्य प्रजातियों पर हावी हो सकते हैं, जिससे वनस्पति समुदाय में बदलाव की संभावना बढ़ जाती है।
इन पौधों पर निर्भर जीवों पर भी पड़ रहा है असर
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि जो पौधे जल्दी अंकुरित होते हैं वे आकार में बड़े हो सकते हैं और इस कारण वे अधिक सूरज की रोशनी, पोषक तत्व और पानी हासिल कर पाते हैं। इससे बाद में अंकुरित होने वाले पौधों के लिए संसाधनों की प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है।
यह प्रतिस्पर्धा पौधों के साथ-साथ उन जीवों को भी प्रभावित करती है जो इन पर निर्भर हैं। इस प्रकार पौधों की प्रजातियों में आने वाला बदलाव पारिस्थितिक तंत्र की पूरी श्रृंखला को प्रभावित करता है। क्योंकि ऐसे में यह भी तय होता है कि कौन सी प्रजातियां पनपती हैं और कौन सी घट सकती हैं।