कोरोना वायरस से बचाव के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई स्वास्थ्य संस्थान नए तथ्यों और तरीकों को जनता के सामने रख रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में कोविड-19 को लेकर जारी अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव कर तीन परतों वाला मास्क पहनने को उचित बताया।
इसी तरह कोविड-19 का संक्रमण मोबाइल फोन पर रह सकता है, इसके लिए जरूरी है कि मोबाइल फोन की स्क्रीन को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। आईआईटी-बॉम्बे के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि कोरोना वायरस की संक्रामक बूंदें सामान्य कांच की तुलना में फोन के कांच की सतह पर सूखने में ज्यादा वक्त लगाती हैं।
फोन की स्क्रीन, कपास और लकड़ी ऐसे सामग्री हैं जो वायरस के लिए सुरक्षित जगह मानी जाती है, यानि कि इन चीजों पर वायरस ज्यादा अवधि के लिए रह सकता है। इसके लिए जरूरी है कि इन सामानों को नियमित रूप से धोते रहें और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
आईआईटी के प्रोफेसर रजनीश भारद्वाज ने बताया कि बूंदों का वाष्पीकरण सतह, तापमान और नमी पर निर्भर करता है। तापमान ज्यादा होने से बूंदों को सोखने और वायरस के संक्रमण को तेजी से खत्म करने में मदद मिली है। जबकि कम तापमान यानि कि नमी ने बूंदों को सोखने में देरी की है।
कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचने के लिए कांच और स्टेनलेस स्टील को समय-समय पर साफ नहीं करना पड़ता है क्योंकि वे हाइड्रोफिलिक हैं यानि कि वे पानी को तेजी से सोखते हैं। वाटरलू यूनिवर्सिटी के प्रो. पीटर हॉल का कहना है कि इन्हीं कारणों से फोन को दिन में दो बार साफ करना चाहिए।
दूसरी तरफ एक और शोध में बताया गया है कि 10 घंटे में अस्पताल के वार्ड की आधी से ज्यादा सतह पर कोरोना एसएआरएस सीओवी-2 वायरस फैल सकता है। यह
बहुत तेजी से प्रसार करता है। सिमुलेशन अध्ययन में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल (यूसीएल) और ग्रेट आर्म्ड स्ट्रीट हॉस्पिटल (जीओएसएच) केस अध्ययन के मुताबिक, अस्पताल के पलंग की रेलिंग में छोड़ा गया। प्रतिरूपित वायरस डीएनए लगभग 10 घंटे में वार्ड की पूरी सतह पर पाया गया और कम से कम 5 दिन तक वहां मौजूद रहा।
स्वच्छता अपनाकर रोका जा सकता है प्रसार
जनरल ऑफ हॉस्पिटल इन्फेक्शन प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया अपने आसपास लगातार स्वच्छता बनाए रखकर ही इससे बचा जा सकता है। यूसीएल की लेना सिरीस का कहना है कि हमारे अध्ययन से यह यह तो साफ हो गया है कि वायरस के प्रसार में सतह अहम भूमिका निभा रही हैं। शोधकर्ताओं ने इसे आइसोलेशन रूम के बिस्तर की रेलिंग पर छोड़ दिया। उन्होंने पाया कि 10 घंटों के भीतर ही यह वार्ड के 41 फीसदी स्थान में फैल चुका था।