फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीबीएसई में फिर से बोर्ड की होंगी 10वीं की परीक्षा, 2018 से लागू होगा नया नियम

Fri, 21 Oct 2016 10:15 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सीबीएसई - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई)  दसवीं की परीक्षा को फिर से  बोर्ड की करने की तैयारी में है। अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर 25 अक्टूबर को इस बारे में औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। योजना के हिसाब से 2018 से दसवीं क्लास की बोर्ड की परीक्षा होंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभालने के बाद जावडेकर का यह बड़ा फैसला होगा।
विज्ञापन


साल 2010 में  सीबीएसई की बोर्ड की परीक्षआ को खत्म कर दिया गया था और उसकी जगह ग्रेडिंग सिस्टम ने ले ली थी। मौजूदा सिस्टम में साल भर छात्रों का टेस्ट होता है और उनकी ग्रेडिंग की जाती है। नए सिस्टम का मकसद छात्रों पर दबाव को कम करना था।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय  'नो डिटेंशन' नीति भी ला सकता है। इसके नीति के तहत किसी छात्र को पांचवीं कक्षा तक फेल नहीं किया जा सकेगा।  हालांकि इसके बाद आठवीं तक छात्रों की कठिन परीक्षा का विकल्प खोजना होगा। और अगर कोई छात्र इस परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे 'फिर' से परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

राज्यों ने शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव की रखी मांग

सीबीएसई - फोटो : Amar Ujala
नर्सरी दाखिले में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर व गुणवत्ता बढ़ाने के लिए देशभर के सरकारी प्राइमरी स्कूलों को प्री-प्राइमरी स्कूल में बदलने का मुसौदा तैयार हो रहा है। विभिन्न राज्यों ने शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव की मांग रखते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा की बजाय नर्सरी से पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। कैब की बैठक में मंत्रालय और राज्यों के शिक्षा मंत्री इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के बीच बुधवार को बैठक हुई, जिसमें शिक्षा का अधिकार कानून विषय पर चर्चा हुई। उत्तराखंड सरकार ने मंत्रालय को कहा कि इस कानून केतहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को दाखिले देने के बदले निजी स्कूलों को केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला पैसा ब्लॉक कर दिया जाना चाहिए। निजी स्कूल चाहे तो बिना पैसे के गरीब छात्रों को पहले की तरह दाखिला देना चाहें तो दे सकते हैं। 

इसके अलावा सरकारी स्कूल में दाखिला करवाने की उम्र छह से घटाकर तीन वर्ष कर देनी चाहिए। प्राइमरी स्कूलों को प्री-प्राइमरी स्कूल में बदल दिया जाना चाहिए, जिसमें पहली की बजाय नर्सरी से पढ़ाई शुरू होती हो। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें