chinese army and indian army(file photo)
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लंबे समय बाद भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़पें हुई हैं। इसके मुख्य कारण गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत की हालिया आक्रामक नीति और कोरोना के मोर्चे पर चीन का घर में बुरी तरह घिरना है। चीन जब घरेलू मोर्चे पर घिरता है तब वह देश में राष्ट्रवाद की भावना पैदा कर नागरिकों का ध्यान मूल मुद्दे से हटाने की कोशिश करता रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो ये घटनाएं एकाएक नहीं हुई, बल्कि चीन सुनियोजित रणनीति के तहत तनाव पैदा कर रहा है।
सामरिक रूप से नाकु ला अहम टकराव के हैं तीन प्रमुख कारण
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बर्फ पिघलने के बाद पेट्रोलिंगः पूरा बर्फीला इलाका है। गर्मियों में बर्फ पिघलने लगी है। ऐसे में दोनों देशों की सेनाओं ने इलाके में पेट्रोलिंग शुरू कर दी है।
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सीमा के निशान नहींः दोनों देशों के बीच सीमा के निशान नहीं हैं। अक्सर सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं।
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चीन बना रहा है सड़कः चीनी सेना वहां सड़क बनाने की कोशिश कर रही है। चुंबी घाटी में वह सड़क बना चुका है, उसे अब और विस्तार देना चाहता है।
2017 में 72 दिन चली थी तनातनी
2017 में सिक्किम के दोकलम में विवादित क्षेत्र में चीन द्वारा सड़क बनाने पर दोनों सेनाओं के बीच तनाव 72 दिन चला था। 16 जून 2017 को झड़प हुई। दोनों सरकारों की कोशिशों के बाद यह 28 अगस्त 2017 को खत्म हुआ। दोकलम में भारत ने चीन को सड़क बनाने से रोक दिया था। चीन का दावा था, वह अपने इलाके में सड़क बना रहा था। अगस्त 2017 में भी दोनों देशों के सैनिकों में लद्दाख में पैंगॉन्ग झील के पास झड़प हुई।
कालापानी मुद्दा नेपाल के विदेश मंत्री बोले, कूटनीति से सुलझाएंगे
नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने कहा, कालापानी समेत सीमा विवाद के मुद्दे भारत के साथ कूटनीतिक पहल के जरिये सुलझाने की कोशिश चल रही हैं।