साल 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में अंतर्कलह सामने आ रही है। इसकी वजह पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (कौएद) है। कौएद के सपा में विलय की एक बार फिर चर्चा है। सूत्रों के अनुसार इस बार मुलायम सिंह यादव खुद इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव इसके खिलाफ हैं। उन्होंने पहले ही कह दिया है कि बाहुबलियों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है। ऐसे में समाजवादी पार्टी में आंतरिक लड़ाई अब खुलकर सामने आ रही है।
बताते चलें कि बीते जून महीने में कौमी एकता दल का सपा में विलय हो गया था। बताया जा रहा था कि इसमें कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इससे नाराज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्रीमंडल से हटा दिया था। हालांकि, विलय रद्द होने के बाद उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल कर लिया गया।
अखिलेश यादव इस पूरे विलय से काफी नाराज दिखे थे। उन्होंने पहले आजमगढ़ में एक प्रोग्राम में कहा कि सपा के कार्यकर्ता पूरे दमखम के साथ काम करेंगे तो किसी और पार्टी के विलय की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी का मानना है कि यह विलय अखिलेश की नाराजगी के बाद ही रद्द करना पड़ा था। पार्टी द्वारा बाहुबलियों को संरक्षण देने का आरोप लगने और लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर वह सरकार को बैकफुट पर नहीं आने देना चाहते थे। इसी को देखते हुए उन्होंने विलय रद्द करने की घोषणा की थी। यह ठीक उसी तरह है जैसे साल 2012 के चुनाव से ठीक पहले डीपी यादव को पार्टी से निकालकर वह चर्चा में आए थे।
माना जाता है कि समाजवादी पार्टी में काम बंटा हुआ है। एक तरफ अखिलेश यादव सरकार चला रहे हैं, तो शिवपाल यादव संगठन की रूप रेखा तैयार करते हैं। हालांकि, कौमी एकता दल के विलय के सूत्रधार बलराम यादव थे, लेकिन उसके पीछे शिवपाल यादव की सहमति थी। वहीं, शिवपाल का कहना था कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव की अनुमति के बाद ही इस ओर कदम आगे बढ़ाया था। इस विलय के रद्द होने के बाद से शिवपाल नाराज चल रहे हैं।