सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्रों, युवाओं और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया। वहीं आइसा की कार्यकर्ता नेहा बोरा ने पत्रकारों को हिरासत में लेने, कैमरे छीनने और एक महिला पत्रकार के मामले में कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि पिछले 10 से 15 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब विपक्षी नेता भी आंदोलन में शामिल हुए तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि छात्रों, युवाओं और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई किसके लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सब एक व्यक्ति यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए किया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं की हिरासत पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने कहा कि दिल्ली में पिछले 10 से 15 दिनों से छात्र संगठन और युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे नेताओं का जिक्र किया गया। दिपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान रेलवे सेवाएं भी बंद की गईं। उन्होंने दावा किया कि 10 अक्तूबर को प्रदर्शन के आह्वान के बाद ऐसा हुआ और यह देश के इतिहास में संभवतः पहली बार था। उन्होंने दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुलाए जाने का आरोप भी लगाया। उनके बयान के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाए गए इन कदमों पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
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पत्रकारों को हिरासत में लेने और दुर्व्यवहार का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की कार्यकर्ता नेहा बोरा ने भी पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को उनके प्रेस कार्ड होने के बावजूद हिरासत में रखा गया। नेहा बोरा ने कहा कि मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को उनके मुताबिक, कई घंटों तक हिरासत में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पत्रकारों के कैमरे भी छीन लिए गए और उन्हें प्रदर्शन की कवरेज करने पर कैमरा वापस नहीं देने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपना काम करने से रोकना और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार करना गंभीर चिंता का विषय है।
महिला पत्रकार की शिकायत पर भी उठाया मुद्दा
नेहा बोरा ने एक महिला पत्रकार से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने विवेक भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन बाद में उसी पत्रकार के खिलाफ भी जवाबी प्राथमिकी (काउंटर एफआईआर) दर्ज कर दी गई। बोरा ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय की मांग करने वाले लोगों की शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शिकायतों की जांच करने की है, न कि किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करने की। इस मामले में भी संबंधित पक्षों और पुलिस का जवाब उपलब्ध नहीं है।
शनिवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने का आह्वान
सीजेपी और अन्य संगठनों ने लोगों से शनिवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचने का आह्वान किया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस आह्वान का समर्थन किया है। यह कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन का अगला चरण बताया जा रहा है। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की मांगों और आगे की रणनीति को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल, आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों, मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर कथित असर तथा पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।