कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन प्रमुख नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका अब भी दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीनों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है और उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि तीनों नेताओं को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है। बताया गया है कि उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107/151 के तहत एहतियाती कार्रवाई के तौर पर हिरासत में रखा गया है। यह घटनाक्रम दिल्ली में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी राजनीतिक गतिविधियों के बीच सामने आया है।
पुलिस बोली- एहतियातन हिरासत में हैं तीनों नेता
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को देखते हुए हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह एहतियाती कार्रवाई है, न कि औपचारिक गिरफ्तारी। तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां मामले में आगे की प्रक्रिया तय होगी।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह वकीलों के साथ पहुंचेंगी
सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें तीनों नेताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वह वकीलों के साथ दिल्ली कैंट थाने पहुंचेंगी। संगठन की ओर से इस मामले में कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। तीनों नेताओं की पेशी को लेकर अब यह देखना अहम होगा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पुलिस क्या आधार प्रस्तुत करती है और आगे हिरासत जारी रखने या रिहाई को लेकर क्या निर्णय होता है।
एहतियातन हिरासत पर क्या कहता है कानून?
एहतियाती पुलिस कार्रवाई का उद्देश्य संभावित अपराध को रोकना और शांति-व्यवस्था बनाए रखना होता है। हालांकि, ऐसी कार्रवाई भी कानून में निर्धारित शर्तों और प्रक्रियाओं के अधीन होती है। पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107 शांति बनाए रखने के लिए संबंधित व्यक्ति से बांड लेने की प्रक्रिया से जुड़ी थी, जबकि धारा 151 संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में पुलिस को बिना वारंट कार्रवाई करने का अधिकार देती थी।
धारा 151 के तहत की गई गिरफ्तारी के मामले में व्यक्ति को सामान्यतः 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि कानून के किसी अन्य प्रावधान के तहत आगे हिरासत का आधार न हो। लागू प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना आवश्यक हो सकता है।
CJP ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मांगी थी जानकारी
इससे पहले सीजेपी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर तीनों नेताओं की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। पत्र में कहा गया था कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार सुबह मुंबई से नई दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि हिरासत में लिए जाने के करीब 12 घंटे बाद भी उनके परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी गई। CJP ने यह भी आरोप लगाया कि वकीलों को जानकारी देने से इनकार किया गया। पार्टी ने पुलिस से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि तीनों नेताओं को कहां रखा गया है, उन्हें एक साथ रखा गया है या अलग-अलग और किस एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लिया है।