चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने स्वामी जी को याद करते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति का वैश्विक चेहरा बताया। सीजेआई ने कहा विवेकानंद की शिक्षाएं और नैतिक मूल्य आज की युवा पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी और प्रासंगिक हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत की संस्कृति और दर्शन के सबसे महान अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे। सीजेआई ने यह बात सुप्रीम कोर्ट में कही। वहां सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और अधिवक्ता परिषद ने मिलकर एक रक्तदान शिविर लगाया था। सीजेआई ने इस शिविर का उद्घाटन किया और फिर मीडिया से बातचीत की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य जज और वरिष्ठ वकील भी वहां मौजूद थे।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सीजेआई ने कहा, "उनका हर शब्द महत्वपूर्ण, दूरदर्शी, नैतिक मूल्यों से भरे हुए थे और हमारे महान देश की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देते थे। वह भारत की संस्कृति और दर्शन के सबसे महान अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे।" उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान और दूरदर्शी नेता थे और उनकी शिक्षाएं देश में काफी महत्वपूर्ण हैं। सीजेआई ने कहा मेरा मानना है कि उनकी शिक्षाएं हमेशा प्रासंगिक रहेंगी और नई पीढ़ी और इस देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।"
राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व
बता दें कि हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। भारत सरकार ने 1984 में इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया था। साल 1985 से इसे हर साल पूरे देश में मनाया जाता है।