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'न्याय-नॉमिक्स से ही बढ़ेगी अर्थव्यवस्था': सीजेआई सूर्यकांत का बयान, बोले- केवल भूगोल से नहीं मिलती तरक्की

Sat, 22 Aug 2026 03:45 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

क्या न्याय प्रणाली भी देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकती है? सीजेआई सूर्यकांत के 'न्याय-नॉमिक्स' और 'न्याय सेतु' के इस नए विजन ने आर्थिक और कानूनी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने क्या-क्या कहा है? जानिए...
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सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नई दिल्ली में आयोजित 11वें ब्रिक्स+ लीगल फोरम को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण विचार सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि सिर्फ भूगोल की किस्मत या प्राकृतिक संसाधनों के भरोसे नहीं टिकी रह सकती। आर्थिक विकास को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए 'न्याय-नॉमिक्स' यानी न्याय के अर्थशास्त्र की जरूरत है।
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सीजेआई सूर्यकांत ने क्या-क्या कहा? 
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी संस्थाएं विकास के आसपास बाद में खड़ा किया गया कोई ढांचा नहीं होतीं, बल्कि वे खुद विकास का मुख्य आधार और वास्तुकला होती हैं। अगर इस आधार को हटा दिया जाए, तो उभरती हुई अर्थव्यवस्था केवल सौभाग्य का एक ढेर नजर आएगी, जो किसी भी बड़े संकट में ढह सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जब अदालतें निष्पक्ष और लगातार सही फैसले देती हैं, तो लोगों का न्याय प्रणाली पर भरोसा बढ़ता है। इससे हर व्यापारिक लेनदेन की लागत कम होती है। बाजार में सभी के लिए समान अवसर बनते हैं, जिससे व्यापार और अर्थव्यवस्था को सीधा बढ़ावा मिलता है।
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संसाधनों के बल पर आगे नहीं बढ़ा है कोई भी देश: सीजेआई
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि भारत समेत ब्रिक्स+ का कोई भी देश केवल अपने संसाधनों के बल पर आगे नहीं बढ़ा है। इन देशों का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वहां वादों और समझौतों को कानूनी रूप से कितना मजबूती से लागू कराया जाता है।
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भाषण के दौरान सीजेआई ने 'न्याय सेतु' का विचार भी दिया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा पुल है जो 11 अलग-अलग देशों की कानूनी परंपराओं को आपस में जोड़ता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश आपस में भरोसे का माहौल खुद बनाएं, न कि किसी चमत्कार का इंतजार करें।
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