पूर्व महिलाकर्मी द्वारा लगाए गए इस आरोप की खबर कुछ समाचार पोर्टल पर प्रकाशित होने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गत 20 अप्रैल को छुट्टी वाले दिन सुनवाई की थी। उस दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था।
चीफ जस्टिस ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा करार दिया था। उन्होंने कहा था कि कोई ताकत चीफ जस्टिस के दफ्तर व न्यायपालिका को निष्क्रिय या तहस-नहस करना चाहती है, लेकिन हम ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे। पीठ ने कहा था कि न्यायपालिका को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों के पीछे साजिश होने का दावा किया था। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने उन्हें नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने बैंस को दायर शपथपत्र में दावों को स्पष्ट करने को कहा था।
बैंस ने अपनी जिस फेसबुक पोस्ट में साजिश की बात कही थी, उसी में उन्होंने ये भी लिखा था कि मुझे लोगों को ये बात बताने से पहले कई वरिष्ठ शुभचिंतकों ने रोका था। शुभचिंतकों ने मुझसे कहा था कि जिन जजों की लॉबी ने ये साजिश रची है, वो मेरे खिलाफ हो जाएगी और मुझे व्यावसायिक रूप से नुकसान पहुंचाएगी।