उच्चतम न्यायालय ने उस खबर को खारिज किया है जिसमें न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के न्यायमूर्ति एस ए बोबडे से मिलने का दावा किया गया था। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों पर बने इन-हाउस जांच पैनल के प्रमुख हैं।
उच्चतम न्यायालय ने एक बयान में कहा कि यह खबर पूरी तरह गलत है कि दो न्यायमूर्तियों ने शुक्रवार शाम न्यायमूर्ति बोबडे से मुलाकात की।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इन-हाउस पैनल उच्चतम न्यायालय के किसी भी अन्य न्यायाधीश से किसी तरह की जानकारी लिए बिना अपने आप विचार-विमर्श करता है। दरअसल रविवार को एक अखबार में यह खबर प्रकाशित हुई है कि न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति बोबडे से मुलाकात की और अपना विचार जाहिर किया कि तीन सदस्यीय समिति को एकतरफा कार्यवाही जारी नहीं रखनी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली महिला ने जांच समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया है और कार्रवाई के दौरान वकील मौजूद रहने की मंजूरी नहीं मिलने समेत कई मुद्दों पर आपत्ति जताई है।
अखबार ने अपनी खबर में कहा है कि न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने इन-हाउस कमेटी की सहायता के लिए एक वकील न्यायमित्र नियुक्त किए जाने की सलाह दी है।
न्यायमूर्ति बोबडे के अलावा इस समिति में उच्चतम न्यायालय की दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल हैं।