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CJI: रिटायर से पहले सीजेआई संजीव खन्ना बोले-सेवानिवृत्ति के बाद कोई आधिकारिक पद नहीं लूंगा

Tue, 13 May 2025 04:50 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सीजेआई ने मंगलवार को कहा कि मैं सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद स्वीकार नहीं करूंगा... शायद कानून के क्षेत्र में कुछ करूंगा। शीर्ष अदालत के कई पूर्व न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने के बाद मध्यस्थता के क्षेत्र में अपनी पारी शुरू करते हैं।
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संजीव खन्ना, सीजेआई - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने मंगलवार को कहा कि वह रिटायर के बाद कोई आधिकारिक पद नहीं लेंगे, लेकिन कानून के क्षेत्र में अपनी पारी जारी रखेंगे। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को 11 नवंबर, 2024 को सीजेआई नियुक्त किया गया था और वह मंगलवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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सीजेआई ने पीठ की औपचारिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद शीर्ष अदालत परिसर में पत्रकारों से मुलाकात की और कहा, मैं सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद स्वीकार नहीं करूंगा... शायद कानून के क्षेत्र में कुछ करूंगा। शीर्ष अदालत के कई पूर्व न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने के बाद मध्यस्थता के क्षेत्र में अपनी पारी शुरू करते हैं। सीजेआई ने कहा, मैं तीसरी पारी खेलूंगा और कानून से संबंधित कुछ करूंगा।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा से जुड़े नकदी विवाद से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, न्यायिक सोच निर्णायक और निर्णयात्मक होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, हम सकारात्मक और नकारात्मक बिंदुओं को देखते हैं और मुद्दे पर निर्णय लेते हैं, फिर तर्कसंगत रूप से हम विभिन्न कारकों पर विचार करते हैं जो हमें सही निर्णय लेने में मदद करते हैं। अगले सीजेआई के तौर पर मनोनीत न्यायमूर्ति बी आर गवई ने भी सेवानिवृत्ति के बाद किसी पद को अस्वीकार करने के संकेत दिये हैं।

अपने चाचा की विरासत को आगे ले गए जस्टिस खन्ना: जस्टिस गवई

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जस्टिस बीआर गवई ने जस्टिस एच आर खन्ना के भतीजे के रूप में सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना की विरासत के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ऐसे नाम की छाया में चलना कोई छोटा काम नहीं है, लेकिन जस्टिस संजीव खन्ना ने उस विरासत को बनाए रखने से कहीं अधिक किया, उन्होंने इसे अपना बनाया। जस्टिस गवई ने जस्टिस खन्ना की स्पष्टता, नैतिक दृढ़ विश्वास और मौलिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की, उनके निर्णयों को सरल, सुंदर और सांविधानिक मूल्यों से ओतप्रोत बताया।

जस्टिस वर्मा विवाद पर बोले- न्यायिक सोच निर्णायक व निर्णयात्मक होनी चाहिए
जस्टिस वर्मा के नकदी विवाद से जुड़े सवाल पर जस्टिस खन्ना ने कहा, न्यायिक सोच निर्णायक और निर्णयात्मक होनी चाहिए। हम सकारात्मक और नकारात्मक बिंदुओं को देखते हैं और मुद्दे पर निर्णय लेते हैं, फिर तर्कसंगत रूप से हम विभिन्न कारकों का मूल्यांकन करते हैं जो हमें सही निर्णय लेने में मदद करते हैं।

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