गत 12 जनवरी को प्रेस कांफ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट केचार जजों में से एक न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ ने शुक्रवार को कहा कि भले ही चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर है लेकिन केसों के आवंटन में उन्हें अन्य जजों से सलाह-मशविरा करना चाहिए।
राजधानी में आयोजित लंबित मामलों को कम करने संबंधी एक सेमिनार में न्यायमूर्ति जोसफ ने साथ ही यह भी कहा कि कोलेजियम द्वारा भेजी गई सिफारिशों को क्लीयर करने में सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए।
एक समयसीमा के भीतर इसे क्लीयर कर देना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जजों की सेवानिवृत्ति की आयु 70 वर्ष करने पर विचार करना चाहिए। न्यायमूर्ति जोसफ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की आयु समान होनी चाहिए।
वहीं इस सेमिनार में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि देश के लोगों को न्यायपालिका पर विश्वास है लेकिन समस्या यह है कि देश की जनसंख्या के अनुपात में जजों की संख्या कम है।
उन्होंने कहा कि बिहार, झारखंड सहित कुछ अन्य राज्यों में जजों की संख्या बहुत कम है। पिछले दिनों मैंने जजों से अनुरोध किया था कि वे अतिरिक्त समय देकर मुकदमों का निपटारा करें। पिछले महीने विभिन्न हाईकोर्ट में शनिवार के दिन काम कर करीब तीन हजार आपराधिक मामलों का निपटारा किया।
साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि नोटिस तामील करने में जोर दिया जाना चाहिए। हजारों मामलों में नोटिस तामील तक नहीं हो पाती। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमों को खत्म करने केलिए अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही न्यायालय को वादी-प्रतिवादियों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।