चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट याचिकाओं का उल्लेख करने की प्रक्रिया खत्म करने के लिये एक नई व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसके तहत नया मामला दायर होने के चार दिन के भीतर वह स्वत: ही सुनवाई के लिये सूचीबद्ध हो जायेगा।
जस्टिस गोगोई ने कहा कि यदि चार दिन तक किसी मामले में इंतजार नहीं किया जा सकता तो वकील मामले को जल्द सूचीबद्ध करने के लिये अदालत के रजिस्ट्रार के पास इसकी चर्चा कर सकता है। इसके बाद मुकदमे की लिस्टिंग हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि एक नई व्यवस्था पर काम चल रहा है, जिसमें याचिका दायर करने के बाद चार दिन के भीतर मामला स्वत: ही सुनवाई के लिये आ जाएंगा। यदि मामला चार दिन इंतजार नहीं कर सकता तो आप वकील शीघ्र सुनवाई के लिये रजिस्ट्रार के समक्ष अपने मामले का उल्लेख कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब उनकी अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक वकील ने अपने मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। अधिवक्ता ने कहा था कि तीन दिन के बाद भी उसकी याचिका सूचीबद्ध नहीं हुई है।
मालूम हो कि उल्लेख करने की प्रक्रिया एक व्यवस्था है जिसके तहत वकील या कोई वादी याचिका दायर करने के बाद अपने मामले की शीघ्र सुनवाई या राहत के लिये चीफ जस्टिस के समक्ष इसका जिक्र करता है।
मालूम हो कि न्यायमूर्ति गोगोई ने प्रधान न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करने के साथ ही तीन अक्टूबर को स्पष्ट कर दिया था कि मुकदमों की प्राथमिकता पर सुनवाई और उल्लेख के बारे में नया पैमाना निर्धारित करने की आवश्यकता है।