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मानदंड तय होने के बाद ही सुनवाई के लिए मामलों का उल्लेख किया जाएगा: सीजेआई

Wed, 03 Oct 2018 02:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ranjan gogoi
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने बुधवार को कहा कि मामलों के अविलंब उल्लेख और सुनवाई के लिये ‘मानदंड’ तय किये जाएंगे। न्यायमूर्ति गोगोई ने भारत के 46 वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में आज शपथ ली। उन्होंने कहा कि जब तक कुछ मानदंड तय नहीं कर लिये जाते, तब तक मामलों के अविलंब उल्लेख की अनुमति नहीं दी जाएगी। 
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उन्होंने कहा कि हम मानदंड तय करेंगे, उसके बाद देखेंगे कि कैसे मामलों का उल्लेख किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कल फांसी दी जा रही हो तब हम (अत्यावश्यकता को) समझ सकते हैं। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 63 वर्षीय न्यायमूर्ति गोगोई को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में एक संक्षिप्त समारोह में शपथ दिलाई। वह न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की जगह देश के प्रधान न्यायाधीश बने हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल तकरीबन 13 महीने का होगा और वह 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त होंगे।
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बता दें कि मुख्य न्यायाधीश के सामने कामकाज की लंबी फेहरिस्त होगी लेकिन इन सबके बीच पिछले कई वर्षों से विवादों में रहा अयोध्या मंदिर विवाद सबसे ऊपर है। इसे निपटाना उनकी अभी की सबसे बड़ी चुनौती होगी। पिछले आठ वर्षों से भी अधिक समय से चला आ रहा देश का यह सबसे अहम मुद्दा है जिसपर देश- दुनिया की निगाहें टिकीं हैं। 

अयोध्या मामले में 28 अक्टूबर को शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच सुनवाई शुरू करने जा रही है। सीजेआई गोगोई को तीन बेंच के लिए जजों की घोषणा करनी है। यह मामला पिछले आठ वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसी के साथ उन्हें सबसे बड़ी चुनौती के रूप में न्यायिक कामकाज की भारी भरकम सूची को निपटाने की होगी। समय- समय पर आ रहे आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में करीब 3.30 करोड़ मामले कोर्ट में लंबित पड़े हैं।

वैसे तो यह लंबे समय से आ रही चुनौती हैं जिसे हर वर्ष और हर नए सीजेआई के लिए यह बड़ी चुनौतियां रहती हैं। करीब एक दशक से न्यायपालिका में जजों के पद खाली हैं जिसकी वजह से मामले लंबित पड़े हैं अब देखना होगा कि गोगोई कितनी जल्दी इसपर कार्रवाई करते हैं। 

कॉलेजियम में सुधार और पारदर्शिता के लिए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) में बदलाव पर पिछले तीन वर्षों से सरकार और सुप्रीम कोर्ट में विवाद रहा है। एमओपी में विरोध के कारण ही देश भर के उच्च न्यायालयों में जजों के 40 फीसदी और सुप्रीम कोर्ट में 20 फीसदी पदों पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है। अब देखना यह होगा कि मुख्य न्यायाधीश गोगोई इस बारे में सरकार के साथ सहमति का पुल कैसे बना पाते हैं।
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