आज सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार का आखिरी कार्य दिवस है। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें एक मानवीय और महान आत्मा बताया। बता दें, रविकुमार की ग्रामीण पृष्ठभूमि से शीर्ष न्यायालय तक की यात्रा असाधारण नहीं थी।
इन लोगों ने दी विदाई
न्यायमूर्ति रविकुमार ने 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वह सर्वोच्च अदालत के नौवें वरिष्ठतम न्यायाधीश थे। अब रविवार को वह सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश खन्ना, न्यायमूर्ति रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की विशेष पीठ ने एक भावुक विदाई दी, जिसमें उनके योगदान को सराहा।
रविकुमार के सामने आई चुनौतियों पर बोले सीजेआई
सीजेआई ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे वह चुनौतियों को पार करते हुए बिना शहरी पृष्ठभूमि के उच्च पदों पर पहुंचे। उन्होंने कहा, 'ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवा करने का गौरव हासिल करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। न्यायमूर्ति रविकुमार ने न केवल इसे हासिल किया है, बल्कि अपने कर्तव्यों में भी बेहतर प्रदर्शन किया है।'
उन्होंने न्यायमूर्ति रविकुमार के न्यायपालिका पर स्थायी प्रभाव को स्वीकार किया और उन्हें भविष्य पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बताया। सीजेआई ने कहा, 'उन्होंने सभी न्यायाधीशों के लिए एक धरोहर छोड़ी है। हम निश्चित रूप से उन्हें याद करेंगे, लेकिन उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि न्यायमूर्ति रविकुमार दिल्ली में ही रहेंगे।
बार का किया आभार व्यक्त
वहीं, न्यायमूर्ति रविकुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान बार से मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'मैं एक वकील था और वह वकील मुझमें हमेशा रहेगा। यही कारण है कि मैं हमेशा बार का उच्चतम सम्मान करता हूं।'
इन लोगों ने भी सराहा
कई न्यायिक हस्तियों, जिनमें अटॉर्नी जनरल आर. वेणकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष कपिल सिब्बल शामिल थे, ने भी सीटी रविकुमार की तारीफ की।सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, 'आप कभी भी भगवान से डरने वाले व्यक्ति नहीं थे, लेकिन आप हमेशा भगवान से प्रेम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। हमने कभी आपकी ऊंची आवाज, गुस्सा या अपमानजनक व्यवहार नहीं देखा।'
कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति रविकुमार के क्रिकेट और प्रकृति के प्रति प्रेम का जिक्र करते हुए कहा, 'जैसा कि आप हर दिन आधे घंटे प्रकृति के साथ गुजारते हैं, वैसे ही मैं भी करता हूं, क्योंकि मैं प्रकृति से रोज कुछ न कुछ सीखता हूं। जानवर कभी किसी जानवर को तब तक नहीं मारते जब तक वे भूखे न हों। लेकिन मनुष्य ऐसा नहीं करता। हमें प्रकृति से सीखना चाहिए और मैं रोज यह सीखता हूं। यह एक बात है जो आपके साथ समान है।'
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति रविकुमार सरल, विनम्र, विचारशील, प्रेमपूर्ण और सबकी सुनने वाले थे।
सीटी रविकुमार के करियर पर एक नजर
- रविकुमार का जन्म छह जनवरी 1960 को केरल के पीरमेडु में हुआ।
- उन्होंने मावेलिकारा के बिशप मूर कॉलेज से जीवविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और केरल के कालीकट के सरकारी लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
- उनके पिता के ओ थेवन चंगनास्सेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट में बेंच क्लर्क थे।
- उन्होंने 12 जुलाई 1986 को वकील के रूप में नामांकन कराया।
- 1990 में वो केरल हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे विभिन्न अदालतों में सिविल, आपराधिक, सेवा और श्रम मामलों में स्वतंत्र अभ्यास शुरू किया।
- उसके बाद उन्हें केरल उच्च न्यायालय में सरकारी वकील, अतिरिक्त सरकारी वकील और विशेष सरकारी वकील (एससी/एसटी) के पद पर नियुक्त किया गया।
- उन्हें पांच जनवरी, 2009 को केरल उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में 15 दिसंबर, 2010 को स्थायी किया गया था।
- 26 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्होंने 31 अगस्त 2021 को शपथ ली।