सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने गुरुवार को एक बार फिर वकीलों से कहा कि वे महत्वहीन मामलों का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख न करें, अन्यथा ऐसे मामले का उल्लेख करने की बार को हासिल विशेषाधिकार अपनी प्रासंगिकता खो देगा।
3 अक्टूबर को सीजेआई का पदभार संभालने वाले जस्टिस गोगोई ने हाल ही में कहा था कि जब तक नियम तय नहीं हो जाते तब तक वह तत्काल सुनवाई के लिए मामलों के उल्लेख की अनुमति नहीं देंगे लेकिन तब तक केवल फांसी पर लटकाने और घर से निकाले जाने जैसे मामलों पर ही तत्काल सुनवाई होगी।
सीजेआई गोगोई और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने एक बार फिर वकीलों से कहा कि वे उन मामलों का उल्लेख करें जो तत्काल सुनवाई के लिए टाले नहीं जा सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि वकीलों को उल्लेख करने का विशेषाधिकार हासिल है। गैर जरूरी मामलों का उल्लेख कर वकील एक दिन इस विशेषाधिकार को खो देंगे।
बीसीसीआई के एक वकील ने तत्काल सुनवाई के लिए याचिका पेश की और कहा कि अगला क्रिकेट मैच 29 अक्तूबर को है और कई ऐसे मामले हैं जिनका निपटारा तत्काल किया जाना जरूरी है। इस पीठ ने कहा कि पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा। क्रिकेट पर हमारी राय को ध्यान दिए बगैर, हम इस पर दशहरा के अवकाश के बाद सुनवाई करेंगे।
पीठ ने कहा कि यदि सभी लोग अपने मामलों की तत्काल सुनवाई चाहते हैं तो दशहरा अवकाश को स्थगित कर देते हैं और पूछा कि क्या बार इस पर सहमत है।