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CJI बीआर गवई का कार्यकाल: 11 ओबीसी, 10 एससी जजों की नियुक्ति; जानें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनकी उपलब्धियां

Sat, 22 Nov 2025 04:39 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सीजेआई बीआर गवई (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के करीब छह महीने के कार्यकाल के दौरान देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में अनुसूचित जाति कैटेगरी से दस, अन्य पिछड़े वर्ग और पिछड़े वर्ग से ग्यारह जजों की नियुक्ति की गई हैं। सीजेआई गवई के कार्यकाल में कई अहम फैसले देखने को मिले। चाहे वह राष्ट्रपति संदर्भ का मामला हो या फिर न्यायिक भर्तियों के जुड़ा फैसला हो।

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देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित सीजेआई जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यों वाले कॉलेजियम को लीड किया, जिसने अलग-अलग हाईकोर्ट के जजों के तौर पर नियुक्ति के लिए सरकार को 129 नामों की सिफारिश की, जिनमें से 93 नामों को मंजूरी दी गई। उनके कार्यकाल के दौरान पांच जजों जस्टिस एनवी अंजारिया, विजय बिश्नोई, एएस चंदुरकर, आलोक अराधे और विपुल मनुभाई पंचोली को भी सुप्रीम कोर्ट के लिए पद्दोनत किया गया। 

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 14 मई से अपलोड किए गए जजों की नियुक्ति की डिटेल्स के मुताबिक, जब जस्टिस गवई भारत के चीफ जस्टिस बने, तो सरकार ने हाईकोर्ट के लिए जिन 93 नामों को मंजूरी दी, उनमें 13 अल्पसंख्यक समुदाय के जज और 15 महिला जज शामिल थीं। उनमें से पांच पुराने या मौजूदा जजों के रिश्तेदार हैं और 49 जज बार से नियुक्त किए गए थे, जबकि बाकी सर्विस कैडर से थे।
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सीजेआई गवई रविवार 23 नवंबर को पद छोड़ देंगे और उनके बाद जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को भारत के अगले चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे। भारत के 52वें  सीजेआई जस्टिस गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल में कई शानदार फैसले दिए हैं, जिनमें वक्फ कानून के मुख्य प्रावधानों पर रोक लगाना, ट्रिब्यूनल सुधार कानून को रद्द करना और केंद्र को प्रोजेक्ट्स को बाद में हरी झंडी देना शामिल है।

शुक्रवार को सीजेआई गवई का आखिरी कार्यदिवस था, जो केजी बालकृष्णन के बाद भारतीय ज्यूडिशियरी को हेड करने वाले दूसरे दलित थे। अपने आखिरी वर्किंग डे पर मिले शानदार फेयरवेल से अभिभूत सीजेआई गवई ने कहा कि वह एक वकील और जज के तौर पर चार दशकों के सफर के आखिर में "पूरी संतुष्टि और संतोष के साथ" और "न्याय के स्टूडेंट" के तौर पर इस इंस्टीट्यूशन को छोड़ रहे हैं।

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