CJI BR Gavai: सीजेआई बीआर गवई ने भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर दोनों देशों की न्यायपालिका के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने भूटानी छात्रों और शिक्षकों से संवाद किया और भारत के सुप्रीम कोर्ट में हर साल भूटान के दो लॉ स्नातकों को लॉ क्लर्क के रूप में अवसर देने की घोषणा की। जस्टिस गवई ने न्यायपालिका में जनता के विश्वास और अदालतों की सांविधानिक भूमिका पर जोर दिया।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री शेरिंग तोब्गे से मुलाकात की और दोनों देशों की न्यायिक प्रणालियों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। सीजेआई भूटान के आधिकारिक दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को राजा वांगचुक और शुक्रवार को प्रधानमंत्री तोब्गे से मुलाकात की।
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बयान में कहा गया कि इन बैठकों के दौरान सीजेआई ने भारत और भूटान की न्यायपालिका के बीच सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की और भारत-भूटान संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जस्टिस गवई ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने के क्षेत्रों में भूटानी न्यायपालिका का समर्थन करने के लिए तैयार है। बयान में यह भी बताया गया कि जस्टिस गवई ने जिग्मे सिंग्ये वांगचुक लॉ स्कूल के छात्रों और शिक्षकों के साथ विस्तृत बातचीत की। इस कार्यक्रम में भूटान की राजकुमारी सोनम देचेन वांगचुक और भूटान के चीफ नोरबु शेरिंग भी मौजूद थे।
छात्रों को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि कानूनी शिक्षा में करुणा, बुद्धिमत्ता और नैतिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का होना बहुत जरूरी है। बयान में यह भी बताया गया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में हर साल भूटान से चयनित दो लॉ स्नातकों को लॉ क्लर्क के रूप में अवसर प्रदान किया जाएगा। यह पहल दोनों देशों की न्यायपालिका के बीच शैक्षणिक और पेशेवर सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। सीजेआई गवई ने 23 अक्तूबर को भूटान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जजों से भी मुलाकात की। दोनों चीफ जस्टिस ने भारत-भूटान न्यायिक सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान पर चर्चा की।
जस्टिस गवई ने भूटान के सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक पेड़ भी लगाया। इसके अलावा, 23 अक्तूबर को उन्होंने थिम्फू के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में जिग्मे सिंग्ये वांगचुक लॉ स्कूल के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास न्यायपालिका की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने बताया कि अदालतें सांविधानिक शासन की प्रणाली में सक्रिय और अनिवार्य भूमिका निभाती हैं और संविधान के उद्देश्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।