भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि हमें वकीलों या नागरिकों से अदालतों तक पहुंचने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए इसके बजाय, अदालतों को उन तक पहुंचना चाहिए। साथ ही कहा कि उन्होंने वकीलों की बातों को हमेशा सुना है। अगर वकील हड़ताल करता है तो इससे न्याय पाने वाले परेशान होते है।
बहुत सारी चीजें बातचीत से हल की जा सकती हैं
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत सारी चीजें बातचीत से हल की जा सकती हैं और बार के सदस्यों के लिए यह महसूस करना महत्वपूर्ण है। यही वह शांति और सामाजिक स्थिरता है, जिसके बारे में मैं बात करता हूं। साथ ही कहा कि अगर कोलेजियम द्वारा लिए गए हर निर्णय के लिए बार-बार हड़तालें होंगी तो यह हमें कहां तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि वकीलों को ऐसा नहीं करना चाहिए।
राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में निर्णय लेता है कॉलेजियम
सीजेआई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि कॉलेजियम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक निर्णय लेता है। उन्होंने कहा, बार के सदस्यों को यह समझना महत्वपूर्ण है कि जब हम प्रशासनिक क्षमता के बारे में निर्णय लेते हैं, तो हम चीजों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। दरअसल, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने 16 नवंबर को पहली कॉलेजियम बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक के बाद उन्होंने मद्रास, गुजरात और तेलंगाना उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का फैसला किया। इस फैसले के बाद वकीलों का विरोध शुरू हो गया और काम बहिष्कार कर दिया गया। इसके बाद शनिवार को सीजेआई ने कहा कि बातचीत से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
रिजिजू ने वकीलों के प्रदर्शन से असहमति जताई
कानून मंत्री किरण रिजिजू ने हाईकोर्ट के कुछ न्यायाधीशों की स्थानांतरण संबंधी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के विरुद्ध कुछ वकील निकायों के प्रदर्शन से असहमति जताई। रिजिजू ने कहा कि यदि कॉलेजियम के हर फैसले के लिए हड़ताल आए दिन की परिघटना बन जाती है तो यह कहां जाएगी। इसका क्या असर होगा?