भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, कोरोना महामारी ने अदालतों को न्याय प्रदान करने के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर किया। हमारा लक्ष्य अब न्यायिक संस्थानों को विकसित करना होना चाहिए और सक्रिय निर्णय लेने के लिए एक और महामारी की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के प्रधान न्यायाधीशों की 18वीं बैठक में सीजेआई चंद्रचूड़ ने कोरोना महामारी की शुरुआत के साथ भारतीय न्यायपालिका की ओर से उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, महामारी के बाद से भारत की जिला अदालतों ने 1.65 करोड, सभी हाईकोर्ट ने 75.8 लाख और सुप्रीम कोर्ट ने 3,79,954 मामले वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सुने। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने महामारी के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के क्षेत्रों की भी सक्रिय रूप से निगरानी की। इस बार की बैठक की मेजबानी भारतीय सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। 10 से 12 मार्च तक चलने वाली तीन दिवसीय बैठक का उद्देश्य आपस में न्यायिक सहयोग को कायम करना है।
एससीओ के सदस्यों में चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ पर्यवेक्षकों के तौर पर जबकि आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और नेपाल बतौर एससीओ संवाद भागीदार इसमें शामिल हैं। शीर्ष अदालत में सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक में हिस्सा लिया। सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ भी बैठक को विभिन्न मुद्दों पर संबोधित करेंगे।
कोरोना ने पेश की तमाम चुनौतियां
सीजेआई ने कहा, कोरोना ने हमारी न्यायिक प्रणाली के लिए कई चुनौतियां पेश कीं। लॉकडाउन ने अदालतों के सुचारू कामकाज को बाधित किया। कोरोना के सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते वकीलों और वादियों को अदालतों में पेशी की अनुमति नहीं थी। न्याय तक पहुंच की अवधारणा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। सीजेआई ने कहा, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों तक आसान पहुंच और न्याय के प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया। ई-अदालतों की ओर कदम बढ़ाने और तकनीकी एकीकरण के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने समेत विभिन्न पहलों के साथ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में पहली बार वर्चुअल सुनवाई की शुरुआत हुई।
सुप्रीम कोर्ट की त्वरित प्रयास रंग लाए
सीजेआई ने कहा, प्रौद्योगिकी को अपनाने और ई-कोर्ट तैयार करने, वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन सुनवाई, तत्काल सुनवाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया, लाइव स्ट्रीमिंग और ई-फाइलिंग में शीर्ष अदालत की त्वरित प्रतिक्रिया ने सुनिश्चित किया कि अदालत के कामकाज में रुकावट संक्षिप्त थी। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और विभिन्न जनहित के मुद्दों में कई पत्र याचिकाओं पर विचार किया, जो महामारी के दौरान उत्पन्न हुए। जैसे प्रवासी मजदूरों से जुड़े संकट, भीड़भाड़ को रोकने के लिए जेलों की भीड़भाड़ और कोरोना संक्रमण का प्रसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के रोगियों के लिए कोरोना की निशुल्क जांच जैसे मुद्दों का समाधान किया।