सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बेला एम.त्रिवेदी चुपचाप सेवानिवृत्त हो गईं। उनके लिए सुप्रीम कोर्ट बार संघ (एससीबीए) की ओर से कोई विदाई समारोह आयोजित नहीं किया गया। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी.आर गवई ने इसकी खुले मंच से आलोचना की। उन्होंने कहा, मुझे खुलकर आलोचना करनी पड़ेगी, क्योंकि मैं सीधी बात कहने में भरोसा रखता हूं। बार संघ को ऐसा रवैया नहीं अपनाना चाहिए था।
सीजेआई गवई, जस्टिस त्रिवेदी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की एक औपचारिक पीठ की अध्यक्षता रहे थे। हालांकि, सीजेआई ने एसएसीबीए के अध्यक्ष कपिल सिब्बल और उपाध्यक्ष रचना श्रीवास्तव की प्रशंसा की कि वे समारोह में मौजूद रहे, भले ही बार संघ ने विदाई समारोह आयोजित नहीं किया।
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उन्होंने कहा, मैं कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव का आभारी हूं कि वे यहां आए। लेकिन बार संघ ने जो रुख अपनाया, उसकी मुझे खुले तौर पर निंदा करनी ही होगी... ऐसे मौके पर बार संघ को ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए था। इसलिए मैं सिब्बल और श्रीवास्तव की मौजूदगी के लिए उन्हें खुले तौर पर सराह रहा हूं। अपनी संस्था के फैसले के बावजूद वे यहां मौजूद हैं। बार संघ ने जो नहीं किया, उसकी कमी आज कोर्टरूम में सभी लोगों की मौजूदगी से पूरी हो गई। इससे साबित होता है कि जस्टिस त्रिवेदी बहुत अच्छी जज हैं। हर जज अलग होता है, लेकिन इस वजह से किसी को उसका हक नहीं रोकना चाहिए। एक बहुत ही अच्छी जज हैं। जज अलग-अलग प्रकार के होते हैं, लेकिन यह बात उस सम्मान को न देने का कारण नहीं बननी चाहिए, जो उन्हें मिलना चाहिए था।
इसी तरह की बात न्यायमूर्ति मसीह ने भी कही। उन्होंने कहा, अजीब है, लेकिन जैसा कि सीजेआई पहले ही कह चुके हैं, मुझे दुख है, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि परंपराओं का पालन होना चाहिए और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अच्छी परंपराएं हमेशा जारी रहेंगी।
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सीजेआई ने अपने संबोधन में जस्टिस त्रिवेदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जिला न्यायपालिका से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर कड़ी मेहनत और निष्ठा के साथ तय किया है। उन्होंने कहा, उन्हें हमेशा उनकी निष्पक्षता, सख्ती, सतर्कता, मेहनत, समर्पण, लगन, ईमानदारी और मेहनती स्वभाव के लिए याद किया जाना चाहिए। सीजेआई गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जस्टिस त्रिवेदी की ईमानदारी और निष्पक्षता को मान्यता दी है।