सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़
- फोटो : पीटीआई
पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने यह कहा
दिल्ली हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की याचिका खारिज होने के बाद युवक के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने आठ नवंबर को सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि युवक को इच्छा मृत्यु नहीं दी जा सकती है, क्योंकि वह अपने जीवन को बनाए रखने के लिए वेंटीलेटर पर नहीं है। बल्कि उसे नली के जरिये भोजन दिया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने और युवक को नि:शुल्क चिकित्सा सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए।
अब मिलेगी यह मदद
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हरीश राणा को घर पर चिकित्सा सहायता मुहैया कराएगी। उसके घर पर नियमित फिजियोथेरेपिस्ट और आहार विशेषज्ञ जाएंगे। एक कॉल पर डॉक्टर इलाज करने पहुंचेंगे। घर पर नर्सिंग इंतजाम होंगे और सभी दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि युवक की घर पर देखभाल नहीं की जा सकती तो उसे जिला अस्पताल नोएडा में इलाज मुहैया कराया जाए। यदि संभव हो तो इलाज और देखभाल के लिए गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर युवक के माता-पिता को भविष्य में जरूरत पड़ती है तो वे कोर्ट आ सकते हैं।
संबंधित वीडियो