नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में बहुमत बनाम नैतिकता की लड़ाई की जमीन तैयार है। सोमवार आधी रात को लोकसभा से लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद पास यह बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल राज्यसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक का समर्थन प्रस्ताव रखेंगे। राज्यसभा की संशोधित सूची में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को शामिल किया गया है। विधेयक को दोपहर 2 बजे सदन में पेश किया जाएगा।
सत्ता पक्ष के सामने लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पक्ष में मतदान करने वाली शिवसेना, जद(यू) को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है। सत्तापक्ष के साथ लोकजनशक्ति पार्टी, एआईडीएमके, जद (बीजू) समेत कई दल हैं। इसके साथ-साथ नये साथियों को भी जोड़ने की चुनौती है। वहीं विपक्ष दलों में कांग्रेस, एनसीपी, राजद, माकपा और अन्य वामदल, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, सपा, बसपा समेत अन्य दल विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष की स्थिति काफी कमजोर है। फिर भी विरोध में 80 मत पड़े थे, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष कमजोर नहीं है। हम राज्यसभा में एकजुटता बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
सत्ता पक्ष से जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह नागरिकता(संशोधन) विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी प्रयास कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी कमान संभाल ली है। सूत्र बताते हैं राजनीतिक दलों से सोनिया गांधी ने भी बातचीत करने का जिम्मा उठाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल समेत अन्य ने सहयोगी दलों से विधेयक के विरोध में सहयोग मांगने की रणनीति बनाई है।
राज्यसभा में सत्ता पक्ष का साथ देने वाले सदस्य अनुपस्थित रहने या मतदान में भाग न लेने की रणनीति अपना सकते हैं। शिवसेना और जद(यू) के सदस्य भी विधेयक का विरोध करने की दशा में इस तरह की रणनीति अपना सकते हैं। इसी तरह से केन्द्र सरकार के रणनीतिकार अन्य दलों से संपर्क करके इस तरह की रणनीति पर अमल कर सकते हैं। इससे जहां विपक्ष का संख्या बल कम होगा, वहीं केन्द्र सरकार को विधेयक को पारित कराने में मदद मिल सकती है।