नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों के एक हजार से अधिक शिक्षाविदों ने शनिवार को एक बयान जारी किया।
अपने बयान में इन शिक्षाविदों ने भुलाए गए अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होने और भारत के सभ्यतागत स्वभाव को बरकरार रखने और धार्मिक प्रताड़ना के कारण भाग कर आने वालों को शरण देने के लिए संसद को बधाई दी।