फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब सीआईएसएफ करेगी जम्मू-कश्मीर-लेह एयरपोर्ट की सुरक्षा, बढ़ेगी फ्लाइट्स की संख्या

Fri, 01 Nov 2019 04:03 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
Kushok Bakula Rinpoche Terminal Ladakh Airport - फोटो : Social Media
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर और लेह, अलग अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब यहां के एयरपोर्ट की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंप दी जाएगी। लेह एयरपोर्ट के विस्तार का खाका तैयार किया जा रहा है। इससे यहां पर घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। फिलहाल यह एयरपोर्ट घरेलू उड़ानों के लिए दोपहर 12 बजे तक ही खुला रहता है। विस्तार होने के बाद देश के 18 से ज्यादा बड़े हवाईअड्डे सीधे लेह से जुड़ जाएंगे।

विज्ञापन

मौजूदा समय में इन तीनों हवाईअड्डों की सुरक्षा सीआरपीएफ व जम्मू कश्मीर पुलिस के पास है। घाटी में बढ़ती आतंकी घटनाओं के मद्देनजर जल्द ही सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों एवं हथियारों से लैस सीआईएसएफ जवान तीनों एयरपोर्ट की सुरक्षा की कमान संभालेंगे। तीनों एयरपोर्ट पर ड्रोन को मार गिराने के लिए चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।

संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं तीनों एयरपोर्ट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संवेदनशील इलाकों में स्थित तीनों एयरपोर्ट 'जम्मू-श्रीनगर-लेह' की सुरक्षा कमान सीआईएसएफ को सौंपने के लिए गत वर्ष 12 नवंबर को आदेश जारी किए थे। पिछले साल गर्मियों में खासतौर पर लेह एयरपोर्ट के बारे में खुफिया एजेंसियों की ओर से एक इनपुट भी जारी किया गया था। इसमें लेह एयरपोर्ट पर मुंबई जैसे आतंकी हमले को अंजाम देने की संभावना जताई गई थी।

इसके बाद गृह मंत्रालय एवं और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने लेह एयरपोर्ट के अलावा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के तीनों एयरपोर्ट यानी जम्मू-श्रीनगर-लेह की सुरक्षा व्यवस्था का गहराई से विश्लेषण किया। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना था कि जांच के दौरान कई तरह की सुरक्षा खामियां सामने आई थीं।

समुद्र तल से ऊंचाई करीब 10,683 फुट

जिस मुस्तैदी के साथ दिल्ली या दूसरे मेट्रो सिटी में स्थित एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिलती है, वैसी इन तीनों एयरपोर्ट पर नहीं थी। कई मामलों में तो सुरक्षा के तय मापदंड भी पूरे नहीं हो रहे थे। एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था के उच्चस्तरीय मापदंडों को पूरा करने के लिए ही तीनों हवाईअड्डों की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले करने की सिफारिश की गई थी।

विज्ञापन


लेह एयरपोर्ट विश्व के अधिकतम ऊंचाई वाले एयरपोर्ट में शामिल है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई करीब 10,683 फुट है। लेह एयरपोर्ट का महत्च इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि लद्दाख क्षेत्र की सीमाएं चीन और पाकिस्तान से मिलती हैं। 

पिछले वर्ष खत्म की थी सामान पहचान व्यवस्था

रक्षा कारणों से श्रीनगर, लेह और जम्मू हवाई अड्डे से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए चेक-इन के बाद सामान की पहचान अनिवार्य थी। इससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से यह जरूरी था। जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु से इस प्रक्रिया को खत्म करने का आग्रह किया था। कुछ दिन बाद अनिवार्य सामान पहचान प्रक्रिया खत्म कर दी गई थी।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को इस बात पर ऐतराज था और वे इसे सुरक्षा में चूक मान रही थीं, लेकिन नई व्यवस्था लागू करने के आदेश ऊपर से आए थे, इसलिए सभी एजेंसियां मौन साधे रहीं। देश के 61 बड़े एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सीआईएसएफ संभाल रही है। इनके अलावा 39 अन्य एयरपोर्ट पर संबंधित राज्यों की पुलिस या दूसरे सुरक्षा बल तैनात हैं।

पुलवामा, बालाकोट और अनुच्छेद 370 के चलते देरी

पिछले साल नवंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीनों एयरपोर्ट की सुरक्षा कमान सीआईएसएफ को सौंपने के लिए सर्वे शुरु करने का आदेश दिया था। संबंधित एजेंसियों ने इस बारे में जानकारी जुटा ही रही थीं कि फरवरी में पुलवामा हमला हो गया। उसके बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक और फिर लोकसभा चुनाव आ गए। इन सबसे राहत मिली तो अगस्त में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बहुत सी पाबंदियां लगा दी गई। अब जाकर उन पाबंदियों में ढील मिली है।

सीआईएसएफ के डीआईजी अनिल पांडे का कहना है कि जल्द ही तीनों एयरपोर्ट पर संसाधन एवं उपकरणों के लिए सर्वे प्रक्रिया शुरु की जा रही है। चूंकि ये तीनों हवाईअड्डे विशेष सुरक्षा के तहत आते हैं, इसलिए यहां पर अन्य एयरपोर्ट के मुकाबले सीआईएसएफ जवानों की अधिक संख्या तैनात की जाएगी। तीनों एयरपोर्ट पर कुल मिलाकर करीब दो हजार जवान तैनात होंगे। लेह एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या बढ़ने के बाद यहां अतिरिक्त जवानों की तैनाती होगी। शुरू में छह सौ जवान एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।

ड्रोन से सुरक्षा के लिए विशेष उपकरण

बता दें कि पिछले कुछ माह से भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही तनातनी के बाद देश के सभी एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। मौजूदा समय में जिस तरह के इंटेलीजेंस इनपुट आ रहे हैं, उनमें ड्रोन से हमला करना भी एक बड़ा खतरा है। एयरपोर्ट के अलावा हवाई जहाजों को भी ड्रोन से निशाना बनाया जा सकता है। हवाई जहाज टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान जब सात आठ सौ मीटर की उंचाई पर होता है, तो उसकी राह में ड्रोन आ सकता है। हवाई जहाजों के करीब ड्रोन न आने पाए, इसके लिए एटीसी को खास हिदायतें जारी की गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से जैसे ही किसी ड्रोन की सूचना एटीसी को दी जाएगी, तुरंत वह इनपुट पायलट के पास पहुंचाया जाएगा। पायलट बिना किसी देरी के अपना रास्ता बदल लेंगे।

सौ एयरपोर्ट रेड जोन में शामिल

ड्रोन हमले के खतरे को देखते हुए अब सौ एयरपोर्ट्स को रेड जोन में शामिल कर लिया गया है। इन एयरपोर्ट पर चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी। सीआईएसएफ, एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर), एयरफोर्स और लोकल पुलिस की स्पेशल यूनिट ड्रोन पर नजर रखेगी। ये चारों एजेंसियां संयुक्त मैकेनिज्म पर काम करेंगी। किसी भी एयरपोर्ट के निकट कोई ड्रोन दिखाई पड़ा, तो उसे बिना किसी देरी के मार गिराया जाएगा।

सीआईएसएफ को एलएमजी सहित दूसरे ऐसे हथियार मुहैया करा दिए गए हैं, जिनकी मारक क्षमता छह सौ मीटर तक है। अगर इससे उपर कोई ड्रोन है, तो उसे मार गिराने या जब्त करने की जिम्मेदारी एयरफोर्स की रहेगी। चारों एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी देरी के हो, इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल शुरु किया जा रहा है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें