कोयला भारत के ऊर्जा और औद्योगिक विकास की रीढ़ है, लेकिन दशकों से देश की इस बेशकीमती संपदा पर संगठित आपराधिक गिरोहों (कोयला माफिया) की बुरी नजर रही है। हाल ही में देश के कानूनी और सुरक्षा ढांचे में हुए एक ऐतिहासिक बदलाव ने इस 'खेल' के नियम पूरी तरह से बदल दिए हैं। अब तक केवल खदानों और रसद मार्गों की रखवाली करने वाला 'सीआईएसएफ' अब पूरी तरह से अधिकार प्राप्त 'वैधानिक प्रवर्तन एजेंसी' बन गया है। पुलिस पर निर्भरता खत्म हो गई है।
माफिया के नए पैंतरे और सीआईएसएफ का 'नाइट एम्बुश' सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए कोयला माफिया लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। हाल ही में तस्करों ने बड़े ट्रकों तक कोयला पहुंचाने के लिए संकरे जंगलों और गांव के रास्तों से मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इसके जवाब में, सीआईएसएफ ने पांच दिनों का एक विशेष 'नाइट एम्बुश' (रात में घात लगाकर) अभियान चलाया और अवैध कोयले से लदी 24 मोटरसाइकिलों को जब्त कर माफिया के इस नए जुगाड़ को भी नाकाम कर दिया।
देश भर में चल रहा है बड़ा अभियान...
करगली यूनिट की यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी है। पूरे देश के कोयला क्षेत्रों में सीआईएसएफ द्वारा इसी तरह के हाई-टेक और सख्त अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे माफिया के हाथों में जाने वाले हजारों टन कोयले को सुरक्षित बचाया जा रहा है। केवल खदानों की चारदीवारी की सुरक्षा से आगे बढ़कर कानून का सीधा डंडा चलाने वाला सीआईएसएफ का यह नया रूप यकीनन एक 'गेम-चेंजर' है। बल सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की राष्ट्रीय संपदा से सिंडिकेट्स की जेबें न भरें, बल्कि यह कोयला देश की तरक्की का ईंधन बने।