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CISF: कोयला माफिया पर अब हो रहा सीधा प्रहार, नए कानूनी अधिकारों से लैस हुआ 'सीआईएसएफ', बना 'गेम-चेंजर'

Sat, 20 Jun 2026 05:32 PM IST
Jyoti Bhaskar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सीआईएसएफ की कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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कोयला भारत के ऊर्जा और औद्योगिक विकास की रीढ़ है, लेकिन दशकों से देश की इस बेशकीमती संपदा पर संगठित आपराधिक गिरोहों (कोयला माफिया) की बुरी नजर रही है। हाल ही में देश के कानूनी और सुरक्षा ढांचे में हुए एक ऐतिहासिक बदलाव ने इस 'खेल' के नियम पूरी तरह से बदल दिए हैं। अब तक केवल खदानों और रसद मार्गों की रखवाली करने वाला 'सीआईएसएफ' अब पूरी तरह से अधिकार प्राप्त 'वैधानिक प्रवर्तन एजेंसी' बन गया है। पुलिस पर निर्भरता खत्म हो गई है।

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यह बड़ा बदलाव 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957' में हुए हालिया संशोधनों से आया है। इसने सीआईएसएफ को रेलवे सुरक्षा बल की तर्ज पर सीधे कार्रवाई करने के अधिकार दे दिए हैं। पहले सीआईएसएफ का काम तस्करों को पकड़कर स्थानीय पुलिस को सौंपने तक सीमित था। इस लंबी प्रक्रिया में होने वाली देरी का फायदा उठाकर माफिया अक्सर कानून की पकड़ से बच निकलते थे।

अब, नए नियमों के तहत अधिकृत सीआईएसएफ अधिकारी सीधे सक्षम न्यायालयों में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वे स्थानीय पुलिस पर निर्भर हुए बिना, अवैध कोयले की तस्करी के शक में वाहनों और परिसरों की स्वतंत्र रूप से तलाशी ले सकते हैं। इस अभूतपूर्व कानूनी ताकत ने ज़मीनी स्तर पर सीआईएसएफ की कार्रवाई को बेहद धारदार बना दिया है, जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हुआ है।
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करगली यूनिट का केस स्टडी
पिछले एक साल के आंकड़ों में देखें सीआईएसएफ के आक्रामक रुख का असर झारखंड के बेरमो कोयलांचल स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की करगली यूनिट में साफ देखा जा सकता है। 

  • बरामदगी में भारी उछाल: साल 2025 में, सीआईएसएफ ने यहां लगभग 24 लाख रुपये कीमत का 1,100 टन अवैध कोयला जब्त किया, जो पिछले वर्ष (2024) जब्त किए गए 250 टन के मुकाबले चार गुना से भी अधिक है।
  • छापेमारी और जब्ती: रेड की संख्या भी 2024 में 128 से बढ़कर 2025 में 220 हो गई। इसके अलावा, तस्करी में शामिल 102 वाहनों को पकड़ा गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ 12 था।
  • करोड़ों की बचत: केवल एक यूनिट में हुई इस सख्त कार्रवाई ने सरकारी खजाने को सालाना 3 से 4 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान से बचाया है।

माफिया के नए पैंतरे और सीआईएसएफ का 'नाइट एम्बुश' सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए कोयला माफिया लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। हाल ही में तस्करों ने बड़े ट्रकों तक कोयला पहुंचाने के लिए संकरे जंगलों और गांव के रास्तों से मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इसके जवाब में, सीआईएसएफ ने पांच दिनों का एक विशेष 'नाइट एम्बुश' (रात में घात लगाकर) अभियान चलाया और अवैध कोयले से लदी 24 मोटरसाइकिलों को जब्त कर माफिया के इस नए जुगाड़ को भी नाकाम कर दिया।

देश भर में चल रहा है बड़ा अभियान...
करगली यूनिट की यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी है। पूरे देश के कोयला क्षेत्रों में सीआईएसएफ द्वारा इसी तरह के हाई-टेक और सख्त अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे माफिया के हाथों में जाने वाले हजारों टन कोयले को सुरक्षित बचाया जा रहा है। केवल खदानों की चारदीवारी की सुरक्षा से आगे बढ़कर कानून का सीधा डंडा चलाने वाला सीआईएसएफ का यह नया रूप यकीनन एक 'गेम-चेंजर' है। बल सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की राष्ट्रीय संपदा से सिंडिकेट्स की जेबें न भरें, बल्कि यह कोयला देश की तरक्की का ईंधन बने।

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