सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम बनाने वाली केंद्र सरकार के विभाग ही इस कानून के अनुपालन में लापरवाह हैं। केंद्रीय विभागों ने एक तो सूचना मुहैया कराने में देरी की और इस कारण आरटीआई कानून के तहत लगा जुर्माना भी पिछले 11 साल से टाल रहे हैं। इस मामले में अब केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को दखल देना पड़ा है। उसने विभागों को अल्टीमेटम जारी करते हुए तत्काल जुर्माने की रकम जमा कराने को कहा है।
केंद्रीय विभागों और उपक्रमों को जुर्माने की रकम जमा कराने के लिए पहले कई बार रिमांइडर दिया गया था। इसके बावजूद वे जुर्माना राशि भरने के लिए सीआईसी नहीं पहुंचे। सीआईसी ने सभी केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (सीपीआईओ) को जुर्माने की वह राशि जमा कराने को कहा है, जो उन पर आवेदक को देरी से सूचना मुहैया कराने पर 2006 से 2017 के दौरान लगाई गई थी। इस मुद्दे पर केंद्रीय आयोग ने चेतावनी भरा पत्र जारी करते हुए तमाम केंद्रीय विभागों को जल्द से जल्द जुर्माने की रकम जमा कराने को कहा है। हालांकि पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 11 साल में बकाया जुर्माने की रकम कितनी है।
सीआईसी ने केंद्रीय विभागों के सीपीआईओ को कहा है कि प्राधिकारों ने सीपीआईओ से जुर्माने की रकम वसूलने को लेकर अक्षमता जता दी है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि आयोग के आदेश के मुताबिक प्राधिकार समुचित कदम नहीं उठा रहे हैं। सभी प्राधिकार जुर्माने की रकम जमा कराना सुनिश्चित कराएं, अन्यथा आयोग इस मामले में सख्त कदम उठाएगा।
सीआईसी ने कहा है कि 11 साल की अवधि के बीच कई केंद्रीय विभागों ने संबंधित सीपीआईओ के रिटायर होने या दूसरे विभाग में स्थानांतरित होने का हवाला भी दिया है जबकि कई सीपीआईओ की मौत हो चुकी है। ऐसी स्थितियां जताकर खुद को मजबूर बता रहे केंद्रीय विभागों को सीआईसी ने सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है।
रोजाना 250 रुपये से लेकर अधिकतम 25 हजार तक है जुर्माना
गौरतलब है कि आरटीआई कानून, 2005 के तहत सूचना नहीं देने या सूचना देने में देरी करने पर सीआईसी संबंधित सीपीआईओ पर रोजाना 250 रुपये का जुर्माना लगाता है। जुर्माने की राशि अधिकतम 25 हजार रुपये तक हो सकती है। सीपीआईओ को जुर्माने की रकम आयोग के समक्ष जमा करानी होती है।