पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की अपने छोटे बेटे संजय गांधी को अपना वारिस बनाने की कोशिश को तत्कालीन सोवियत संघ गंभीरता से नहीं लेता था। उसका मानना था कि राजीव गांधी उनके स्वाभाविक वारिस होने चाहिए। ये बातें अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों में कही गई हैं।
31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के अगले दिन तैयार एक रिपोर्ट में सीआईए ने कहा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के देखते हुए रूस भारत की सुरक्षा चिंताओं को बखूबी भूनाएगा। सीआईए का मानना था कि भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद सोवियत संघ ने विकासशील देशों में अपना एक सबसे अहम साथी खो दिया था। इसमें आगे कहा गया है कि सोवियत संघ इंदिरा गांधी की अपने छोटे बेटे संजय गांधी को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने की कोशिश को गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन 1980 में संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी उनके स्वाभाविक उत्तराधिकारी बन गए।
उस वक्त सीआईए ने यह भी आशंका जताई थी कि सोवियत संघ राजीव गांधी की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सहयोग करेगा और वह यह साबित करने की कोशिश करेगा कि भारत के साथ उसका रिश्ता उतना ही प्रगाढ़ रहेगा जितना उनकी मां के वक्त था। इसमें यह भी कहा गया है कि इंदिरा की मौत के बाद सोवियत संघ ने यह भी प्रचारित किया था कि उनके हत्यारे वैचारिक रूप से सीआईए से प्रभावित थे।