आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर देश का चुनावी माहौल गरमा रहा है। रैलियां, नारे और लोक लुभावन चुनावी वादों की झड़ी के बीच सियासी पारा चढ़ रहा है। इसी माहौल पर पेश है चुनिंदा काव्य पंक्तियां जो हमारी लोकतंत्र की समझ को मजबूत करेंगी। मतदान जरूर करें। साथ ही अपने विवेक का इस्तेमाल भी करें। आपका मतदान आपके आगामी पांच सालों की रूपरेखा तय करेगा।
सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या,
खौफ बिखरा है दोनों सम्तो में,
तीसरी सम्त का दबाव है क्या।
- डाॅ. राहत इंदौरी