क्राइस्टचर्च मस्जिद में बंदूकधारी ने नमाज पढ़ रहे लोगों को मार दिया था। (फाइल फोटो)
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न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में लगभग 15 मार्च को बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर नमाज पढ़ रहे लोगों की हत्या कर दी थी। इस हमले में सात भारतीयों की मौत हो गई थी। इसमें एक भारतीय कोच्चि की रहने वाली थी जिसका शव आज उसके घर पहुंच गया है। उसके रिश्तेदारों ने उसे याद करते हुए बताया कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर समर्पित थी।
इस छात्रा का नाम अनसी अलीबावा है। उसकी उम्र 25 साल है। वह उन पांच पहले भारतीयों में से एक थी जिन्हें कि श्वेत चरमपंथी ने अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। उसका शव सोमवार को कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचा। परिवार स्नातकोत्तर की छात्रा का अंतिम संस्कार पास के गृहनगर कोडुनगल्लूर में करेगी।
अलीबावा अल नूर मस्जिद में अपने पति अब्दुल नजेर के साथ प्रार्थना कर रही थी। तभी ऑस्ट्रेलियन बंदूकधारी वहां पहुंचा और लोगों पर गोलियां बरसाने लगा। कुछ परिवारों ने क्राइस्टचर्च में ही अपने प्रियजनों को दफना दिया है। न्यूजीलैंड में शुक्रवार को पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
कोडुनगल्लूर के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मीं अलीबावा ने अपने परिवार की मदद करनी पांच साल पहले शुरू कर दी थी क्योंकि उसके पिता की सऊदी अरब में मौत हो गई थी। उसने अपनी पढ़ाई के लिए कई हजारों डॉलर का कर्ज ले रखा था। वह क्राइस्टचर्च की लिंकन यूनिवर्सिटी से बिजनेस अग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रही थी।
अलीबावा के कजिन पीएस नियास ने कहा, 'पढ़ाई के प्रति समर्पित छात्रा जल्द ही अपनी पढ़ाई पूरी करने वाली थी। वह पिछले साल वहां गई थी। उसका कोर्स अप्रैल में खत्म होने वाला था। इसके बाद उसकी छह महीने की ट्रेनिंग थी और वह दिसंबर में घर वापस आने वाली थी।'
अलीबावा नजेर के साथ सुपरमार्केट में पार्ट टाइम काम करती थी। दोनों की दो साल पहले शादी हुई थी। 15 मार्च को वह अल-नूर मस्जिद में महिला और पुरुषों के लिए बने अलग वर्गों में बैठी थी। तभी वहां बंदूकधारी पहुंच गया। नजेर आपातकालीन दरवाजे से भागने में सफल रहा लेकिन अनसी ऐसा नहीं कर पाई और उसकी मौत हो गई।