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चिटफंड घोटाला तृणमूल के लिए बना फांस, जांच के घेरे में कई नेता

Tue, 05 Feb 2019 05:50 AM IST
sapna singla रीता तिवारी, अमर उजाला, कोलकाता
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ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में हजारों करोड़ का चिटफंड घोटाला विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। 6 साल से इन घोटालों के खुलासे के बाद केंद्र और ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार के बीच अक्सर तलवारें खिंचती रही है। घोटाले की चपेट में आकर राजनीति और पत्रकारिता के क्षेत्र के बड़े-बड़े दिग्गज धराशायी हो चुके हैं।
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ममता सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच लगातार कड़वाहट भी इससे बढ़ी है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्षी राजनेता शुरू से ही केंद्र पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय समेत तमाम एजेंसियों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं। 

ममता के मंत्री को जाना पड़ा जेल 

शारदा घोटाले में राज्य सरकार को पहला झटका 12 दिसंबर 2014 को ममता बनर्जी के दाहिने हाथ रहे परिवहन मंत्री मदन मिश्र की गिरफ्तारी से लगा। उनको 21 महीने जेल में काटने पड़े। उनके अलावा सांसद सृजय बसु और तृणमूल उपाध्यक्ष मुकुल राय को भी सीबीआई पूछताछ का सामना करना पड़ा। बसु ने राजनीति से संन्यास ले लिया। राय ने भाजपा का दामन थाम लिया।

पत्रकारों को भी जाना पड़ा जेल

बीते साल दिसंबर में सीबीआई ने राज्य के वरिष्ठ पत्रकार और आनंद बाजार समुह के अलावा टाइम्स समूह के बांग्ला दैनिक के संपादक रहे सुमन भट्टाचार्य को भी गिरफ्तार किया। उन पर चिटफंड कंपनी आईकोर समुह से पैसे लेने का आरोप है। उनसे पहले एक अन्य पत्रकार और संपादक कुणाल घोष को शारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में कई साल जेल की सजा काटनी पड़ी थी। 

ममता ने पूर्व सरकार पर लगाया आरोप 

ममता ने निवेशकों के ठगे जाने पर दुख जताते हुए हालात के लिए पूर्ववर्ती वाममोर्चा और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था विपक्ष उनकी और राज्य सरकार की छवी खराब कर रहा है। ममता के मुताबिक चिटफंड कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए पूर्व सरकार ने जो अध्यादेश पारित किया उसमें कई खामिया थी। 

10 लाख करोड़ से ज्यादा का घोटाला

अनुमान के मुताबिक शारदा समुह ने राज्य के गरीब निवेशकों से लगभग ढाई-ढाई हजार करोड़ की रकम जुटाई थी। केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक ऐसी 64 कंपनियां सक्रिय थी। इन कंपनियों ने आम लोगों से लगभग 10 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। निवेशकों और एजेंटों समेत एक दर्जन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई डूबने के गम में आत्महत्या कर ली।  
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