चिटफंड क्षेत्र का विकास करने और उद्योग के समक्ष आ रही अड़चनों को दूर करने के इरादे से केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में चिटफंड संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। इस मौके पर ठाकुर ने कहा, चिटफंड सालों से छोटे कारोबारों और गरीब वर्ग के लोगों के लिए निवेश का स्रोत रहा है लेकिन कुछ पक्षकारों ने इसमें अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद सरकार ने एक परामर्श समूह बनाया।
उलका ने सवाल उठाया कि सरकार इस संबंध में बताए कि क्या पहले से चालू चिटफंड इस विधेयक के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने ओडिशा में चिटफंड के कथित घोटालों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में सीबीआई जांच की स्थिति पूछी। उन्होंने कहा, चिटफंड में कथित राजनीतिक संरक्षण भी होता है इसलिए सारे अधिकार राज्य सरकार को नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने विधेयक में और प्रावधान शामिल करने का सुझाव देते हुए इसे स्थाई समिति को भेजने की मांग की।
चिटफंड संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आपस में उलझ रहे टीएमसी व भाजपा सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा, ये लोकसभा है और इसे बंगाल विधानसभा न बनाएं। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने आरोप लगाया कि पूरी टीएमसी चिटफंड फर्जीवाड़े में शामिल है।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का नाम लिये बिना चटर्जी ने आरोप लगाया कि गरीबों का पैसा लेकर भागने वालों को मुख्यमंत्री का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चिटफंड घोटाले की 40 फीसदी रकम दलालों के पास गई जो टीएमसी के सदस्य हैं। इस पर टीएमसी सांसद कल्यान बनर्जी भड़क गए और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस पर स्पीकर ने टिप्पणी की कि लोकसभा को बंगाल विधानसभा न बनाया जाए।